न्यूजीलैंड में हजारों प्रवासी पक्षी देंगे दस्तक, क्या वे प्राणघातक बर्ड फ्लू भी अपने साथ लाएंगे ?

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 20, 2023

बर्ड फ्लू बीमारी के प्रकोप से पूरी दुनिया प्रभावित है और न्यूजीलैंड को इसके संभावित तौर पर देश में दस्तक देने से पहले खुद को तैयार रखना चाहिए। पिछले कुछ वर्षों में, अधिक से अधिक पक्षी इस घातक वायरस के नए उप प्रकारों के साथ यहां आए हैं क्योंकि यह नई प्रजातियों को संक्रमित करने के लिए विकसित हो रहे हैं। यह अब जलीय पक्षियों के बीच ‘पैनज़ूटिक’ (जानवरों की एक महामारी) का कारण बन रहा है। यह वायरस, जिसे अत्यधिक संक्रामक एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के रूप में जाना जाता है, संभवतः पहले ही दुनिया भर में हजारों पक्षियों को मार चुका है (सटीक संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल है)। इसके अलावा, स्तनधारियों जैसे गैर-पक्षी जीवों में इसका फैलाव आम होता जा रहा है। मानव में बर्ड फ्लू के केवल कुछ मामले सामने आए हैं लेकिन बिल्लियों, लोमड़ी और जलसिंह (सी लायन) में संक्रमण की दर चिंताजनक है। पिछले 20 वर्षों के दौरान अत्यधिक संक्रामक बर्ड फ्लू फैलाने वाले वायरस के उप प्रकारों का प्रसार अंतरमहाद्वीपीय स्तर पर हुआ है।

ऐसा माना जाता है कि कोई भी प्रवासी समुद्री पक्षी जो आमतौर पर न्यूजीलैंड में उतरते हैं, हमारे तटों तक पहुंचने से पहले इस बीमारी से मर जाते हैं। लेकिन कुछ पक्षी बिना लक्षण वाले संक्रमण से प्रभावित हो सकते हैं, यहां तक ​​​​कि ऐसे उप प्रकार भी आमतौर पर अत्यधिक संक्रामक होते हैं। इसके अलावा, समुद्री स्तनधारियों सहित संक्रमण को प्रसारित करने वाले अतिसंवेदनशील प्रजातियों के हालिया विस्तार से यह खतरा बढ़ गया है कि कुछ प्रजातियां यहां वायरस का प्रसार कर सकती हैं। जहां तक ​​भौगोलिक विस्तार की बात है, तो अनुसंधान से ज्ञात हुआ कि पक्षियों का प्रवास यूरोप से लेकर अटलांटिक के पार अमेरिका और साथ ही पूरे यूरेशिया में वायरस फैलाने के लिए जिम्मेदार है। ऐसी परिस्थिति में न्यूज़ीलैंड क्यों नहीं? क्या हम सचमुच बहुत दूर हैं? महामारी को रोकने के लिए कैसी तैयारी करें यदि यह अत्यधिक संक्रामक एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस आ जाता है, तो न्यूजीलैंड उतना तैयार नहीं है जितना वह हो सकता था।

इसका प्रमुख कारण यह है कि हमारे पास वन्यजीवों की वायरस संबंधी निगरानी की उतनी सक्रिय व्यवस्था नहीं है। न्यूजीलैंड कई प्रकार की बीमारियों के लिए गाय, भेड़ और मुर्गी सहित पशुधन की निगरानी करता है। लेकिन लोगों और गैर-कुक्कुट पशुधन पर इस वायरस का प्रभाव न्यूनतम होने की संभावना है। पहला संकेत समुद्री पक्षियों या समुद्री स्तनधारियों की मृत्यु हो सकता है। हालांकि न्यूजीलैंड शायद कीवी या काकापो जितना प्रतिष्ठित नहीं है, लेकिन यह बड़ी संख्या में समुद्री पक्षियों का घर है जो ग्रह पर और कहीं नहीं पाए जाते हैं। कुछ प्रजातियां, जैसे तारा इति (या फेयरी टर्न) लुप्तप्राय हैं, इस प्रजाति के केवल 50 पक्षी बचे हैं और वायरस से संक्रमण होने पर यह प्रजाति विलुप्त हो सकती है या इनकी संख्या में और कमी आ सकती है। इस जोखिम को देखते हुए, अमेरिका ने एवियन इन्फ्लूएंजा के खिलाफ कैलिफोर्नियाई कोंडोर के टीकाकरण की योजना को अमली जामा पहनाया लेकिन यह तब किया गया जब 21 कोंडोर (कुल संख्या का चार प्रतिशत) मृत पाए गए और उनमें एच5एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई थी।

न्यूजीलैंड को किस चीज पर नजर रखनी चाहिए और हम किसी भी घुसपैठ का जल्द पता लगाने के लिए बेहतर तरीके से कैसे तैयार हो सकते हैं? जागरूकता बढ़ाना: जानवरों में अप्रत्याशित मौतें एक खतरे का संकेत हैं। आमतौर पर, ऐसी घटनाओं की जांच प्राथमिक उद्योग मंत्रालय द्वारा की जाती है। लेकिन हमें जनता को इस बारे में बेहतर जानकारी देनी चाहिए कि अगर उन्हें कोई मरा हुआ पक्षी या जलसिंह दिखाई दे तो उन्हें क्या करना चाहिए। जांच: ज्ञात रोगाणुओं की सक्रिय और लक्षित निगरानी बढ़ाना। एवियन इन्फ्लूएंजा के लिए 2004 से प्रतिवर्ष गैर पालतू पक्षियों का सर्वेक्षण किया जाता रहा है। हालांकि, 2010 के बाद से ध्यान प्रवासी पक्षियों से हटकर गर्मी के महीनों में निवास करने वाले पक्षियों के नमूने लेने पर केंद्रित हो गया है। जीनोमिक्स: वायरस के अनुवांशिकी अनुक्रमण (जीनोमिक्स) क्षमताओं का उपयोग करें जो हमने पहले ही कोविड-19 महामारी के दौरान स्थापित कर ली है। उदाहरण के लिए, यूरोप में, एवियन इन्फ्लूएंजा के कुछ प्रकार फैल रहे हैं जो स्तनधारियों को संक्रमित करते हैं। यदि वायरस यहां आता है, तो वायरल जीनोमिक्स का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है ताकि हमें पता चल सके कि हम किस प्रकार से निपट रहे हैं, और हमारी प्रतिक्रिया को सूचित कर सकते हैं।

हालांकि, ये उपाय सहज तरीके से समझ आते हैं, वास्तविकता यह है कि मनुष्यों, घरेलू जानवरों और वन्यजीवों को प्रभावित करने वाली बीमारी की निगरानी काफी हद तक कम व्यवस्थागत और अल्प-संसाधन वाली है। इन क्षेत्र में गतिविधियां सीमित है। इसका परिणाम यह है कि हम वर्तमान में इस घातक वायरस को ट्रैक करने और न्यूजीलैंड में पहुंचने पर तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार नहीं हैं। हम उभरते रोगाणुओें के लिए अपनी निगरानी व्यवस्था के एकीकरण करने की वकालत कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि एक अधिक उन्नत और एकीकृत ‘वन हेल्थ’ निगरानी प्रणाली प्रदान की जाए, जिसमें हमारी महामारी (और पैनज़ूटिक) तैयारियों का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी विभागों की विशेषज्ञता शामिल हो।

प्रमुख खबरें

IPO Market में जबरदस्त हलचल: अगले हफ्ते 5 कंपनियां जुटाएंगी ₹7,443 करोड़, Investors के लिए बड़ा मौका

Maruti Suzuki का ₹35,000 करोड़ का Investment Plan: 5 साल में 63 लाख कारों की बिक्री का है महा-लक्ष्य

Galle Test से पहले Team India में बड़ा फेरबदल, Sai Sudharsan की जगह Sarfaraz Khan को मिली जिम्मेदारी

Shubman Gill फिट, Yashasvi Jaiswal का जलवा, Sri Lanka के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया का दमदार प्रदर्शन