Manipur Violence में हजारों महिलाएं आई ऑपरेशन के खिलाफ में, सुरक्षा बलों को छोड़ने पड़े 12 उग्रवादी

By रितिका कमठान | Jun 25, 2023

मणिपुर में इन दिनों हिंसा जारी है। इसी बीच सुरक्षा बलों को उग्र भीड़ से निपटना काफी भारी पड़ रहा है। इम्फाल में ऐसा ही कुछ माहौल देखने को मिला जब सुरक्षा बलों के तलाशी अभियान को स्थानीय महिलाओं ने ही रोक दिया। इस अभियान को रोक कर महिलाओं ने 12 उग्रवादियों को भी छुड़ाने में सफलता हासिल कर ली है।

जानकारी के मुताबिक मणिपुर के इथम गांव में सुरक्षा बलों द्वारा तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। इस अभियान को देखते हुए स्थानीय विद्रोही समूह के 12 गिरफ्तार उग्रवादियों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। स्पीयर कॉर्प्स ने भी इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर दी और बताया कि ऑपरेशन इस तरह से विफल हुआ था। स्पीयर्स कॉर्प्स के मुताबिक इलाके में 1200-1500 महिलाओं ने भीड़ में एक साथ पहुंचकर उन्हें घेरा और उग्रवादियों को मुक्त करवाया।

सेना ने दी जानकारी
इंफाल ईस्ट के इथम गांव में महिलाओं के नेतृत्व वाली भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच गतिरोध के बाद सेना ने नागरिकों की जान जोखिम में न डालने का ‘‘परिपक्व फैसला’’ लिया और बरामद किए गए हथियारों व गोला-बारूद के साथ वहां से हट गई। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। इस कार्रवाई के बाद भीड़ और सैनिकों के बीच गतिरोध उत्पन्न हुआ था।

अधिकारियों ने बताया कि केवाईकेएल एक मेइती उग्रवादी समूह है, जो 2015 में छह डोगरा इकाई पर घात लगाकर किए गए हमले सहित कई हमलों में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि इथम में गतिरोध शनिवार को पूरे दिन चलता रहा, हालांकि ‘‘महिलाओं के नेतृत्व वाली उग्र भीड़ के खिलाफ बल के इस्तेमाल और उससे लोगों के हताहत होने की बात को ध्यान में रखते हुए अभियान के कमांडर द्वारा परिपक्व निर्णय लिए जाने के बाद यह सामप्त हो गया।’’

अधिकारियों के मुताबिक, गांव में छिपे लोगों में स्वयंभू लेफ्टिनेंट कर्नल मोइरांगथेम तंबा उर्फ उत्तम भी शामिल था, जो एक वांछित उग्रवादी है और जिसे डोगरा हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। उन्होंने बताया कि इथम में महिलाओं के नेतृत्व में 1,500 लोगों की भीड़ ने सेना की टुकड़ी को घेर लिया था और उसे अभियान को अंजाम देने से रोका था। अधिकारियों ने कहा, ‘‘सुरक्षा बलों ने बार-बार आक्रामक भीड़ से उन्हें कानून के तहत कार्रवाई करने देने की अपील की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।’’ उन्होंने बताया कि इसके बाद सेना ने ‘‘मणिपुर में व्याप्त अशांति के कारण जानमाल के अतिरिक्त नुकसान से बचने’’ के लिए वहां से हटने का निर्णय किया। मणिपुर में मेइती और कुकी समुदाय के बीच मई की शुरुआत में भड़की जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। गौरतलब है कि मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मेइती समुदाय की है और यह मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहती है। वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और यह मुख्यत: पर्वतीय जिलों में रहती है।

प्रमुख खबरें

Ayush Shetty का World Championship में ऐतिहासिक आगाज, World No. 1 Shi Yuqi को बेंगलुरु में चटाई धूल

Tim Seifert की आतिशी पारी से Manchester Super Giants चैंपियन, Lord’s में Trent Rockets का खिताबी सपना टूटा

Hockey World Cup: England के खिलाफ 32 साल का सूखा खत्म करने से चूका India, अब Pakistan से महामुकाबला

NGT ने Belagavi झील में मछलियों की मौत पर कर्नाटक सरकार से जवाब मांगा