विश्वासघाती चीन की कम्पनियों को बाहर का रास्ता दिखाने का समय आ गया है

By अवनिन्द्र कुमार सिंह | Jun 19, 2020

कोरोना वायरस को लेकर इस दिनों विश्व के निशाने पर आये चीन ने लद्दाख के गलवान घाटी पर दबदबे को लेकर जो आक्रामक रुख अख्तियार किया है उसका जवाब देना जरूरी है। एलएसी पर गलवान घाटी और पैंगाग पर अतिक्रमण किए चीन के सैनिकों द्वारा अस्थाई निर्माण की सूचना के बाद पहुंचे भारतीय सैनिकों से खूनी संघर्ष किया जिसमें भारत के कर्नल सहित 20 जवानों की शहादत हुई। यह क्षति देश बर्दाश्त नहीं कर सकेगा और समय पर इसका माकूल जवाब देना भी जरूरी है। इस घटना से चीन ने न केवल भारत के भरोसे पर विश्वासघात किया है बल्कि अपने दोहरे चरित्र का प्रमाण भी दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधरने के आसार थे मगर वर्तमान परिस्थिति ने वर्ष 1962 के युद्ध के बाद वाले हालात पैदा कर दिए हैं। 

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यह वक्त की मांग है कि देश आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़े और भारतीय बाजारों से चीन निर्मित उत्पादों का पूर्ण बहिष्कार हो। यह ठीक है कि भारत जुनूनी देश है और आक्रोश में क्षणिक बहिष्कार कर पुनः उन उत्पादों को अपना लेते हैं, मगर अब पानी सर से ऊपर बह चुका है और केंद्र सरकार को इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए चीन को आर्थिक चोट पहुंचानी होगी। साथ ही भारत में पाँव पसार रही चीन की कम्पनियों को भी बाहर का रास्ता दिखाना होगा। तानाशाह चीन को यह कड़ा संदेश देने की आवश्यकता है कि यह बदलता भारत है, वह 1962 वाला भारत सोचने की भूल न करे। भारत अब ताकतवर देशों की श्रेणी में है, जहां आधुनिकता के साथ भारी सैन्यबल है। इनके जुनून और जिद के आगे अन्य किसी भी देश के सैनिक परास्त हो जाएंगे। 

-अवनिन्द्र कुमार सिंह

दुर्गाकुंड, वाराणसी

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