सिक्के की खनखनाहट (व्यंग्य)

By डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ | Jun 11, 2022

एक पढ़े लिखे बेरोजगार की जेब से पाँच रुपए का सिक्का गिर गया। वह इधर-उधर ढूँढ़ने लगा। बड़े परेशान हो गया। पास में एक युवक खड़ा था। हाथ में महंगा फोन, स्मार्ट वाच और गले में सोने की चैन, अंगुलियों में कीमती अंगुठियाँ आँखों पर स्टाइलिश गगल्स और पैरों में लेदर के जूते। कुल मिलाकर अमीर घराने से उसके ताल्लुकात थे। उसने बेरोजगार से पूछा- भई! तुम इतने परेशान क्यों हो? ऐसा क्या खो दिया तुमने। बेरोजगार ने कहा– साहब! मैने पाँच रुपए का सिक्का खो दिया। वही ढूँढ़ रहा हूँ। यह सुनकर अमीर युवक हँसने लगा। सिर्फ पाँच रुपए के लिए इतने परेशान हुए जाते हो? 

इसे भी पढ़ें: डायबिटीज और डायवर्टिज (व्यंग्य)

बेरोजगार ने कहा– यहाँ बात पाँच रुपए की नहीं है। बात है पैसे के वैल्यू की। कभी पैसे से पूछने की कोशिश करना कि पैसा तुम क्या-क्या कर सकते हो? तब पैसा तुम्हें जरूर बताएगा– मैं हरीश्चंद्र से झूठ बुलवा सकता हूँ। पति-पत्नी के बीच झगड़े लगा सकता हूँ। बाप-बेटों को अलग कर सकता हूँ। भाई-भाई के बीच शत्रुता बढ़ा सकता हूँ। मनमुटाव ला सकता हूँ। दोस्ती तुड़वा सकता हूँ। यहाँ तक कि प्रेमी-प्रेमिका तक को लड़वा सकता हूँ। इसके लिए लोग एक-दूसरे का गला काटने के लिए तैयार हो जाते हैं। पैसा दिखने में कोई मेटल या कागज का टुकड़ा दिखता है, लेकिन इसके न होने पर सबकी औकात पता चल जाती है। यह ऐसा चुंबक है जो लोहे को नहीं इंसान को खींचता है। यहाँ सवाल पैसे या रुपए का नहीं उसके आदर और सम्मान का है। जब तक यह है तब तक समाज आपको सलाम ठोंकता है। इसके न होने पर गली के कुत्ते से भी जिंदगी बदतर हो जाती है।   

टीचर ने पढ़ाया, इंसान सांसों का मोहताज होता है, 

लेकिन दुनिया ने सिखाया, पैसा ही सिरताज होता है।।

- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त'

प्रमुख खबरें

Argentina की जीत पर Egypt का हंगामा, रेफरी विवाद पर FIFA का कड़ा जवाब- हमारे फैसलों पर सवाल न उठाएं।

फुटबॉल का विवाद सियासत में पहुंचा, New York Mayor बोले- रेफरी के गलत फैसले से हारा Egypt

Chess की दुनिया में 17 साल के अश्वत का कमाल, फाइनल जीतकर बने भारत के 98वें ग्रैंडमास्टर

AI Talent का Superpower बना भारत, CEA नागेश्वरन बोले- दुनिया में अब हम दूसरे नंबर पर