By संतोष उत्सुक | Jan 28, 2025
विशेषज्ञों की फ़ौज बढ़ती जा रही है। ख़ास नुस्खे बता रहे हैं कि गला काट प्रतिस्पर्धा भरी इस दुनिया में, एक बार मिली ज़िंदगी में, बढ़िया सेहत कैसे बनाए रखें। अब वो वक़्त तो रहा नहीं कि सुबह सैर कर ली, दिन में जिस्म तोड़ मेहनत और रात को नींद खुद चली आई। अतिविकास के ज़माने में जीना मुश्किल होता जा रहा है। दुनिया के शीर्ष विशेषज्ञ, जिनमें मनोवैज्ञानिक, फिजिशियन, तनाव व बर्न आउट एक्सपर्ट, न्यूट्रिशियन, न्यूरो साइंटिस्ट, ब्रेन साइंटिस्ट, एप्लाइड साइकोलजिस्ट, नींद विशेषज्ञ और पुस्तक लेखक शामिल हैं, की सलाह का हलवा बनाकर खाया जाए तो ज़िंदगी बेहतर होनी ही है।
मानसिक सुस्ती भगाने के लिए कह रहे हैं हर दस मिनट के बाद, दस फुट दूर, किसी वस्तु को दस पल तक देखें। फुर्सत किसे है, सब अस्त व्यस्त हैं। विशेषज्ञ समझा रहें है, यदि आप संतुलित डाइट लेते हैं तो शरीर पोषण की ज़रूरत खुद पूरी करता है। कितने लोगों को पता है कि उनके लिए संतुलित डाइट क्या है, क्या वे ले रहे हैं, ले सकने के काबिल हैं। कहा जा रहा है सप्ताह में तीन दिन, चार मिनट दौड़ने और एक मिनट ध्यान लगाने से भावनात्मक संतुलन सुधर जाता है।
अच्छी, ज़रूरी, पूरी नींद अब सस्ता सोना मिलने जैसा है। फोन स्वादिष्ट चाट की मानिंद हो चुका है। फ़िल्में, चैनल, तन पसंद मनोरंजन के बिस्तर पर नींद कैसे आ सकती है। नई तरह के कई कैमरों की सुविधाओं से लैस लाजवाब फोन, किश्तों में हाज़िर हैं। विकासजी ने इस्तेमाल करने के लिए, असंख्य चीज़ें बनवा दी हैं जो घर भेज दी जाती हैं। विशेषज्ञ कह रहे हैं नींद टूटने के बाद, फिर नहीं आ रही तो पीठ के बल लेटकर, चार तक गिनते हुए सांस लें, सात तक गिनते हुए सांस रोकें और आठ तक गिनते हुए सांस छोड़ें, इसे दस बार दोहराएं। इसके बाद तीन सौ से उल्टी गिनती गिनें। नवोन्मेषी सलाह, लेकिन संतुष्ट होने के बाद गिनती किसे याद रहती है।
इन सुपर विशेषज्ञों की बातें यह साबित करती हैं कि ज़िंदगी हिसाब किताब के सिवा अब कुछ नहीं रही।
- संतोष उत्सुक