Tirupati Laddu Controversy | सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति के लड्डू में 'पशु चर्बी' विवाद की नए सिरे से SIT जांच के दिए आदेश, कहा- मुद्दे को राजनीति से दूर रखें

By रेनू तिवारी | Oct 04, 2024

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में परोसे जाने वाले लड्डू में पशु वसा के उपयोग से संबंधित आरोपों की जांच के लिए एक नए स्वतंत्र विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ तिरुपति लड्डू विवाद की अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पिछली सुनवाई की तारीख (30 सितंबर) पर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा की गई सार्वजनिक टिप्पणियों की आलोचना करने के बाद, न्यायालय ने केंद्रीय जांच की आवश्यकता पर केंद्र से राय मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एन चंद्रबाबू के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार के इस आरोप की विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच के आदेश दिए कि युवजन श्रमिक रायथु (वाईएसआर) कांग्रेस पार्टी की पिछली सरकार ने तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में लड्डू तैयार करने के लिए पशु चर्बी वाले घटिया घी का इस्तेमाल किया था। जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने निर्देश दिया कि एसआईटी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के दो अधिकारी, आंध्र प्रदेश राज्य पुलिस के दो अधिकारी और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी होंगे। 

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एसआईटी जांच की निगरानी सीबीआई निदेशक द्वारा की जाएगी

न्यायालय ने कहा कि एसआईटी जांच की निगरानी सीबीआई निदेशक द्वारा की जाएगी। न्यायालय ने आगे स्पष्ट किया कि वह तिरुमाला मंदिर देवता के करोड़ों भक्तों की भावनाओं को आहत करने के लिए आदेश पारित कर रहा है और उसके निर्देश को राज्य सरकार द्वारा गठित वर्तमान एसआईटी के सदस्यों की विश्वसनीयता पर प्रतिबिंब के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले में आरोपों और प्रति-आरोपों के गुण-दोष पर कुछ भी नहीं देखा है। न्यायालय ने आदेश में कहा, "हम स्पष्ट करते हैं कि हम न्यायालय को राजनीतिक युद्ध के मैदान के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देंगे।"

 राजनीतिक हथियार के रुप में इस मुद्दे को न भुना जाए

कार्यवाही के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल होने से रोकने के अपने इरादे पर जोर दिया, अधिकारियों ने कहा, "हम अदालत को राजनीतिक युद्ध के मैदान के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देंगे" और "हम नहीं चाहते कि यह राजनीतिक नाटक में बदल जाए।" सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी सुझाव दिया कि एसआईटी की जांच की निगरानी केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए, उन्होंने जांच प्रक्रिया में निगरानी और ईमानदारी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। मेहता ने आगे टिप्पणी की कि अगर लड्डू विवाद से जुड़े आरोपों में कोई सच्चाई है, तो उन्हें "अस्वीकार्य" माना जाएगा।

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