Titan का बड़ा Game Plan: Premium Segment से आएगा 25% रेवेन्यू, Helios Lux स्टोर्स का होगा विस्तार।

By Ankit Jaiswal | Jun 04, 2026

भारतीय उपभोक्ताओं के बीच महंगी और प्रीमियम घड़ियों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है और इसी रुझान को देखते हुए देश की प्रमुख घड़ी निर्माता कंपनी टाइटन ने इस वर्ग पर बड़ा दांव लगाया है। कंपनी का मानना है कि 25 हजार रुपये से अधिक कीमत वाली घड़ियां आने वाले दो से तीन वर्षों में उसके कुल घड़ी कारोबार के राजस्व का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा दे सकती हैं।

बता दें कि टाइटन के पास वर्तमान में हेलियोस लक्स के लगभग 10 स्टोर हैं, जहां 25 हजार रुपये से अधिक कीमत वाली घड़ियां बेची जाती हैं। कंपनी चालू वित्त वर्ष के दौरान इन स्टोरों की संख्या बढ़ाकर करीब 30 करने की योजना बना रही है। वहीं हेलियोस श्रृंखला के लगभग 300 स्टोर पहले से संचालित हो रहे हैं और उनका प्रदर्शन भी मजबूत बना हुआ है।

कुरुविला मार्कोस का कहना है कि भारत में प्रीमियम घड़ियों का बाजार एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है। उनके अनुसार घरेलू घड़ी बाजार का लगभग आधा हिस्सा अब 25 हजार रुपये से अधिक कीमत वाली घड़ियों का हो चुका है और आने वाले समय में इसका मूल्य और बढ़ने की संभावना है।

गौरतलब है कि भारत का घड़ी उद्योग लंबे समय तक कम और मध्यम कीमत वाले उत्पादों पर आधारित रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती आय, बेहतर जीवनशैली और ब्रांडेड उत्पादों के प्रति झुकाव ने प्रीमियम घड़ियों की मांग को नई दिशा दी है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं।

टाइटन का मानना है कि भारत भविष्य में स्विट्जरलैंड, जापान और चीन के बाद वैश्विक घड़ी निर्माण का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। कंपनी के अनुसार देश में घड़ी निर्माण की तकनीक, डिजाइन और कारीगरी लगातार बेहतर हो रही है। साथ ही लोगों में घड़ियों को केवल समय देखने के साधन के बजाय एक विशेष पहचान और संग्रहणीय वस्तु के रूप में देखने की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है।

हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि कम कीमत वाली घड़ियों का बाजार भी मजबूत बना हुआ है। फास्टट्रैक, सोनाटा और अन्य लोकप्रिय ब्रांडों की बिक्री में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की जा रही है। टाइटन का मानना है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब बिना ब्रांड वाली घड़ियों से ब्रांडेड घड़ियों की ओर बढ़ रहे हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार फिलहाल 25 हजार रुपये से अधिक कीमत वाली घड़ियां टाइटन के कुल घड़ी राजस्व में लगभग 15 प्रतिशत योगदान देती हैं। लेकिन कंपनी को उम्मीद है कि अगले दो से तीन वर्षों में यह हिस्सा बढ़कर 25 प्रतिशत से अधिक हो सकता है।

इसके अलावा हाल ही में हुए भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार समझौतों के कारण स्विस घड़ियों पर आयात शुल्क में कमी आने की संभावना भी बढ़ी है। इससे विदेशी प्रीमियम घड़ियों की उपलब्धता और मांग दोनों में वृद्धि हो सकती है। टाइटन पहले ही हरबेलिन, ऑगस्टे रेमंड और यू-बोट जैसे कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भारतीय बाजार में ला चुकी है और भविष्य में भी नए ब्रांड जोड़ने की तैयारी कर रही है।

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