भारत की राजनीति में घुसने के लिए चीन ने बनाया था वाम दलों को अपना दोस्त, विजय गोखले का खुलासा

By रेनू तिवारी | Aug 03, 2021

पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने अपनी नयी किताब में भारत के पड़ोसी देश के साथ संबधों को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। विजय गोखले ने अपनी किताब में चीन के बारे में खुलासा किया है कि चीन ने भारत की राजनीति में दखल देने के लिए भारतीय वाम दलों का सहारा लिया था। चीन ने 2007 और 2008 के बीच भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के लिए "घरेलू विरोध का निर्माण" करने के लिए भारत में वाम दलों के साथ अपने "निकट संबंधों" का इस्तेमाल किया। यह भारतीय घरेलू राजनीति में राजनीतिक रूप से संचालित करने के लिए चीन का पहला उदाहरण था। इस कदम का भारत की राजनीति और कूटनीति पर प्रभाव पड़ा। पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले की नई किताब, द लॉन्ग गेम: हाउ द चाइनीज नेगोशिएट विद इंडिया का हिस्सा है, जिसे पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित किया गया था, जिसने हाल ही में स्टैंड हिट किया।

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गोखले की पुस्तक में छह विषयों को शामिल किया गया है, जिन पर भारत और चीन ने पिछले 75 वर्षों में बातचीत की - भारत की पीपुल्स रिपब्लिक चीन की मान्यता से लेकर तिब्बत तक, पोखरण, सिक्किम में परमाणु परीक्षण, भारत-अमेरिका परमाणु समझौता और मसूद अजहर की 'वैश्विक' के रूप में सूची संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आतंकवाद शामिल है। 

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