पर्यावरण बचाने के लिए (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Jun 05, 2025

सार्वजनिक रूप से वह हमेशा कहते रहे कि पर्यावरण को बचाते हुए विकास ने भरपूर योगदान दिया है लेकिन उनका दिल जानता था कि हुआ क्या है और क्या नहीं हुआ। इस बात का उन्हें संजीदा एहसास हो गया था कि पर्यावरण बचाने के लिए अब नई रणनीति का होना ज़रूरी है। उनकी पवित्र आत्मा झकझोर रही थी इसलिए अब उन्हें नए ढंग से चिंता करनी ही थी।

पर्यावरण को कुछ न कुछ फायदा हो इसलिए उन्होंने अपनी जीवन शैली बदलने का साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने निर्णय लिया कि रोज़ ज़मीन पर बैठकर कुछ मिनट तक आंखें वाकई बंदकर चिंतन मनन करेंगे। आज तक उन्होंने कोई भी कार्य उचित तरीके से नहीं किया अब करेंगे ताकि आत्मिक शक्ति विकसित हो। यह नैतिक कार्य घर में नहीं हो सकता इसलिए संकल्प लिया पड़ोस में बने पार्क में करेंगे। यह वही पार्क है जिसे बनने के बाद भुला दिया गया। उन्होंने अपना पहनावा बदलने का संकल्प भी लिया। अब रोज़ नीला या हरा ही पहना करेंगे। रविवार को सिर्फ सफ़ेद वस्त्र ही धारण करेंगे ताकि उनके व्यक्तित्व से शांति का सन्देश प्रेषित हो। 

उन्होंने निर्णय लिया कि पर्यावरण सुधारने के लिए जो भी विचार करना है लकड़ी की पुरानी आरामदायक कुर्सी पर बैठकर करेंगे । कुर्सी पर विराजने के बाद आंख मींच कर नहीं बल्कि पूरी आंखें खोलकर ही सोचेंगे। गहरा सोचने के लिए ठोड़ी के नीचे उंगलियां चिपका कर रखेंगे। सिर पर हाथ रखकर कभी न सोचेंगे क्यूंकि इससे गलत सन्देश प्रेषित हो जाता है। जीन्स पहनकर काफी मंथन कर चुके लेकिन बात नहीं बनी। अब अंतर्राष्ट्रीय  ब्रांड की नीले रंग की नेकर पहनकर, सफ़ेद रंग की टी शर्ट चुनी जिस पर एक चिड़िया की तस्वीर और ‘लव द नेचर’ भी छपा है। 

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उन्होंने हरे रंग की कैप लगाकर भाषण सुने और हाथ में सफ़ेद दस्ताने पहनकर समाज व प्रशासन के ज़िम्मेदार लोगों के साथ दौड़ लगाई। लेकिन अगली ही सुबह फिर लगने लगा कि कुछ ठोस नहीं हो पाया। दिमाग फिर डांटने लगा कि कुछ और बेहतर सोचो। फिर एक दिन घर से प्लास्टिक का पुराना सामान कूड़े वाले को देने की योजना बनाई लेकिन पत्नी के न मानने के कारण असफल हो गए। पत्नी ने कहा प्लास्टिक का सारा सामान जोकि मुझे बहुत प्रिय है घर से बाहर करने के लिए तैयार हूं ताकि पर्यावरण जल्दी सुधर जाए लेकिन पीतल और तांबे का नया सामान लाने के लिए बजट कहां से आएगा। घर का वातावरण ठीक रखने के लिए पहले यह बताइए। उनके पास फिलहाल कोई जवाब नहीं था।    

यह बात सुबह सुबह ही हुई, नाश्ता करते हुए उन्होंने कल से योग करने का निश्चय किया। अपनी सेहत को ठीक रखने के लिए हलके फुलके व्यायाम करने के बाद रोजाना शवासन करने का निर्णय किया ताकि पहले अपना और घर का स्वास्थ्य ठीक रहे और जीवन का वातावरण शांत रहे। बदली हुई परिस्थितियों के कारण, पर्यावरण सुधार की महत्वपूर्ण योजना बारे गहन विचार विमर्श फिर से स्थगित हो गया।    

- संतोष उत्सुक

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