By दिव्यांशी भदौरिया | Mar 02, 2026
साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण होली से पहले लगने जा रहा है। 3 मार्च, 2026 (मंगलवार) को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना घटने जा रही है। इस बार फाल्गुन पूर्णिमा चंद्र ग्रहण लगने वाला है और यह ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। इस दिन भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण नजर आएगा। चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के अनुसार, 3 मार्च को होने वाले इस इवेंट का मैग्नीट्यूड 155 होगा, जिससे यह एक गहरा पूर्ण ग्रहण बन जाएगा।
क्यों खास है यह चंद्रग्रहण?
असल में पूर्ण चंद्रग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधे में होते हैं और पृथ्वी, सूर्य व चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस दौरान पूरा चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया (अम्ब्रा) में चला जाता है। बता दें कि, ग्रहण की अवस्था में चंद्रमा अक्सर लाल रंग दिखाई देता है, जिसको ब्ल़ड मून भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए होता हैं क्योंकि पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली लाल रोशनी ही चंद्रमा तक पहुंच पाती है, वहीं नीली रोशनी बिखरने लगती है।
क्या कहा IMD ने?
IMD ने कहा कि भारत में, क्षेत्र के हिसाब से विजिबिलिटी अलग-अलग होगी। देश में ज्यादातर जगहों पर चंद्रोदय का समय ग्रहण का आखिरी चरण दिखाई देगा। लेकिन, नॉर्थ-ईस्ट भारत के कुछ हिस्सों और अंडमान और निकोबार आइलैंड्स में भी ग्रहण का आखिरी फेज देखा जा सकेगा।
जानें चंद्रग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार)
-ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 3:20 बजे
-पूर्ण ग्रहण शुरू: शाम 4:34 बजे
-पूर्ण ग्रहण समाप्त: शाम 5:33 बजे
-ग्रहण का समापन: शाम 6:48 बजे
इसके अलावा, यह चंद्र ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी दिखाई देगा।
पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधे में होते हैं और पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ सकती है। जिससे सीधी धूप नहीं पड़ती। दरअसल, पूर्ण ग्रहण के वक्त चंद्रमा अक्सर लाल दिखाई देगा क्योंकि पृथ्वी के वायुमंडल से सिर्फ लाल रोशनी ही गुजरती है, जबकि नीली रोशनी बिखर जाती है।