By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 14, 2026
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने सोमवार को कहा कि भारतीय दूरसंचार नेटवर्क के प्रबंधन एवं खतरों का पता लगाने के तरीके को कृत्रिम मेधा (एआई) बदल सकती है, लेकिन इसके बढ़ते इस्तेमाल के साथ सुरक्षा उपाय, मानवीय निगरानी और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने की क्षमता भी जरूरी है क्योंकि प्रौद्योगिकी अधिक स्वायत्त होती जा रही है। लाहोटी ने कहा कि जैसे-जैसे एआई संचार नेटवर्क में अधिक गहराई से शामिल हो रही है, दूरसंचार परिचालकों और प्रौद्योगिकी कंपनियों को जिम्मेदार एआई में निवेश करने, जोखिम का आकलन करने, निर्णयों का रिकॉर्ड रखने और इस्तेमाल से पहले मॉडलों का परीक्षण करने की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि अधिक प्रभाव वाले सिस्टम में मानवीय निगरानी बनी रहनी चाहिए।
इससे पारंपरिक स्वचालन से आगे बढ़कर अधिक स्वायत्त नेटवर्क की दिशा में बदलाव का रास्ता खुल रहा है। लाहोटी ने कहा कि हालांकि, एआई पर बढ़ती निर्भरता से ऐसे जोखिम भी पैदा होते हैं, जिनसे निपटने के लिए परिचालकों और नियामकों को तैयार रहना होगा। प्रणाली को ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाना चाहिए, जिनमें स्वचालित फैसले गलत होने से निपटने की क्षमता हो।
इसमें यह देखना शामिल है कि गलत फैसले को कितनी जल्दी पलटा जा सकता है और एआई पर निर्भर कोई कार्य उपलब्ध नहीं होने पर भी सेवाएं जारी रह सकती हैं या नहीं। उन्होंने आगाह किया कि अधिक बुद्धिमत्ता से नेटवर्क में विफलता का कोई नया एकल बिंदु (सिंगल पॉइंट ऑफ फेल्योर) नहीं बनना चाहिए। लाहोटी ने कहा, ‘‘उपभोक्ताओं के लिए भरोसा विश्वसनीयता, पारदर्शिता, सुरक्षा, उचित व्यवहार और इस विश्वास से बनता है कि कुछ गलत होने पर प्रभावी शिकायत निवारण उपलब्ध है।’’ ट्राई चेयरमैन ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और घोटालों से निपटने में एआई की दोहरी भूमिका का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि यह प्रौद्योगिकी असामान्य गतिविधियों और खतरों का पता लगाकर भरोसा मजबूत कर सकती है, लेकिन गलत इस्तेमाल होने पर नुकसानदेह गतिविधियों को अधिक जटिल भी बना सकती है। लाहोटी ने साथ ही कहा कि एआई आधारित बहुभाषी और आवाज आधारित सहायता भी उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत कर सकती है। संदिग्ध बातचीत का सामना करने पर ऐसी प्रणालियां संदर्भ के अनुरूप चेतावनी दे सकती हैं, जो भारत जैसे भाषाई विविधता वाले देश में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत का अगला डिजिटल बदलाव केवल इस बात से तय नहीं होगा कि हम कितने लोगों को जोड़ते हैं, बल्कि इससे तय होगा कि हम उन्हें कितनी समझदारी, सुरक्षित, समावेशी और जिम्मेदार तरीके से जोड़ते हैं।