60 करोड़ धोखाधड़ी: कर्ज को निवेश बताने का खेल, Raj Kundra और Shilpa Shetty के बैंक खातों पर EOW की पैनी नजर

By रेनू तिवारी | Oct 16, 2025

व्यवसायी राज कुंद्रा और उनकी अभिनेत्री-पत्नी शिल्पा शेट्टी से जुड़े 60 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में धन के लेन-देन की जांच की जा रही है और यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दोनों द्वारा किए गए खर्च वास्तविक थे या नहीं। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) 2015 से इस दंपति से जुड़ी एक कंपनी के बैंक खातों की जांच कर रही है और यह पता लगा रही है कि उसमें बताए गए खर्च वास्तविक थे या नहीं।

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60 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला क्या है?

अगस्त 2025 में, मुंबई के एक व्यवसायी दीपक कोठारी ने शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के खिलाफ ₹60 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। दीपक कोठारी के अनुसार, उनकी मुलाकात शिल्पा और कुंद्रा से 2015 में एजेंट राजेश आर्य के माध्यम से हुई थी। उस समय, दोनों बेस्ट डील टीवी के निदेशक थे और शिल्पा के पास कंपनी के 87% से अधिक शेयर थे।

शिकायत के अनुसार, एक बैठक में यह तय हुआ कि दीपक शिल्पा और राज कुंद्रा की कंपनी को ऋण देंगे। कंपनी के लिए ₹75 करोड़ का ऋण मांगा गया था, जिस पर 12% वार्षिक ब्याज तय किया गया था।

दीपक कोठारी का आरोप है कि बाद में शिल्पा और कुंद्रा ने उनसे कहा कि ऋण पर कर संबंधी समस्या हो सकती है, इसलिए वे इसे निवेश के रूप में दिखाएँगे और हर महीने रिटर्न देंगे। अप्रैल 2015 में, कोठारी ने लगभग ₹31.95 करोड़ का पहला भुगतान किया। टैक्स संबंधी समस्याओं के चलते, सितंबर में एक और सौदा हुआ और जुलाई 2015 से मार्च 2016 के बीच, उन्होंने ₹28.54 करोड़ अतिरिक्त हस्तांतरित कर दिए।

कुल मिलाकर, उन्होंने ₹60.48 करोड़ और ₹3.19 लाख स्टाम्प शुल्क का भुगतान किया। कोठारी का दावा है कि अप्रैल 2016 में शिल्पा ने उन्हें व्यक्तिगत गारंटी भी दी थी, लेकिन उसी वर्ष सितंबर में उन्होंने कंपनी निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया।

इसके बाद, शिल्पा की कंपनी द्वारा ₹1.28 करोड़ का ऋण न चुकाने का मामला सामने आया। कोठारी को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने बार-बार अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन उन्हें कोई जवाब या पैसा नहीं मिला।

शुरुआत में, जुहू पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत मामला दर्ज किया गया था। चूँकि राशि ₹10 करोड़ से अधिक थी, इसलिए जाँच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दी गई है। EOW इस मामले की जाँच कर रही है।

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