By Ankit Jaiswal | Jul 21, 2026
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन भारत सहित करीब 60 देशों पर नए आयात शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। यदि यह फैसला लागू होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता और अधिक जटिल हो सकती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार अमेरिकी प्रशासन ने कुछ देशों की व्यापार नीतियों और कथित जबरन श्रम से जुड़े मामलों की जांच के आधार पर यह प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अलावा भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, मेक्सिको और यूरोपीय संघ जैसे देशों की विनिर्माण क्षमता से जुड़े अलग-अलग मामलों की भी जांच की जा रही है। इन जांचों के आधार पर भविष्य में और अधिक शुल्क लगाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत हो चुकी है। दोनों देशों के अधिकारियों ने कई बार बातचीत में सकारात्मक प्रगति का संकेत दिया, लेकिन अभी तक अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। बाजार पहुंच, कृषि, डिजिटल व्यापार, औद्योगिक उत्पादों और शुल्क में रियायत जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि उनकी अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ रचनात्मक बैठक हुई थी। उनके अनुसार दोनों देशों ने ऐसे संतुलित और व्यावसायिक रूप से उपयोगी समझौते के लिए प्रतिबद्धता दोहराई है, जिससे दोनों देशों के कारोबार, किसानों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं को लाभ मिल सके। हालांकि फिलहाल किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
इस बीच कुछ अर्थशास्त्रियों और व्यापार विशेषज्ञों ने नए आयात शुल्क को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि बड़े पैमाने पर शुल्क बढ़ाए जाते हैं तो इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है, महंगाई बढ़ सकती है और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता आ सकती है। उनका यह भी मानना है कि आयात शुल्क का अतिरिक्त बोझ अंततः उपभोक्ताओं और आयातकों पर पड़ता है।
बता दें कि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले अधिकांश उत्पादों पर भी 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। ट्रंप लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि अमेरिका को व्यापार के मामले में अन्य देशों से नुकसान उठाना पड़ा है और आयात शुल्क के जरिए इस स्थिति को बदला जा सकता है।
हालांकि कई व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार घाटा किसी भी देश के साथ व्यापारिक संबंधों का अकेला पैमाना नहीं होता। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका की प्रस्तावित शुल्क नीति वैश्विक व्यापार और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को किस तरह प्रभावित करती हैं।