By अभिनय आकाश | Jun 17, 2026
जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस के खूबसूरत स्पा शहर 'एवियन-लेस-बेन्स' में G7 शिखर सम्मेलन के लिए पहुंचे, तो वहां झील किनारे का सौम्य नजारा भी अंदरूनी तनाव को छिपा न सका। हाल के महीनों में ट्रंप ने जिस तरह सार्वजनिक मंचों पर अपने साथी राष्ट्राध्यक्षों का मजाक उड़ाया, उनकी आलोचना की और उनसे उलझे, उसने न सिर्फ पुराने जख्मों को हरा कर दिया है बल्कि आपसी मतभेदों की नई खाई भी खोद दी है। ऐसे अशांत माहौल में दुनिया के ये शीर्ष नेता ईरान संकट, यूक्रेन युद्ध और डगमगाती वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए जुटे हैं। इस कड़वाहट की फौरी वजह ईरान के खिलाफ वाशिंगटन (अमेरिका) के सैन्य अभियानों में शामिल होने से कई अमेरिकी सहयोगियों खासकर नाटो देशों का पीछे हटना है। वैसे, G7 के साथ ट्रंप के रिश्तों की खटास सालों पुरानी है। उनके पहले कार्यकाल के दौरान भी शिखर सम्मेलन तनाव से भरे होते थे, लेकिन तब सहयोगी देश आपसी एकजुटता बनाए रखने के लिए अक्सर ट्रंप की तीखी बयानबाजी को नजरअंदाज कर दिया करते थे। मगर सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार हालात बदले हुए हैं और कुछ नेताओं ने खुलकर पलटवार करना शुरू कर दिया है।
शुरुआत में ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच रिश्ते, कार्नी से पहले के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ रहे रिश्तों की तुलना में ज़्यादा अच्छे लग रहे थे। लेकिन CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापार को लेकर हुए विवादों और दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में कार्नी के दिए भाषण ने ट्रंप की सोच बदल दी। एपी ने बताया कि ट्रंप अक्सर कनाडाई नेता को गवर्नर कार्नी कहकर बुलाते रहे हैं। यह तंज इस बात पर कसा जाता है कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। कार्नी ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया देने से ज़्यादातर परहेज ही किया है।
CNN के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रंप के साथ करीबी कामकाजी संबंध बनाने की कोशिश में कई महीने बिताए। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि इसका फ़ायदा भी हो रहा है। लेकिन ईरान के ख़िलाफ़ वॉशिंगटन के मिलिट्री कैंपेन का समर्थन करने से स्टार्मर के इनकार के कारण रिश्तों में खटास आ गई। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ब्रिटिश नेता को यह कहकर खारिज कर दिया कि हम विंस्टन चर्चिल से डील नहीं कर रहे हैं। बाद में ट्रंप ने कहा कि ब्रिटेन की आदत है कि वह युद्धों में तभी शामिल होता है, जब हम पहले ही जीत चुके होते हैं।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को अक्सर यूरोप में ट्रंप के सबसे करीबी वैचारिक सहयोगियों में से एक माना जाता रहा है। ट्रंप ने पहले भी उनकी तारीफ़ करते हुए उन्हें "शानदार" बताया है और उनके नेतृत्व की सराहना की है। फिर भी, CNN ने रिपोर्ट दी कि जब इटली ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य अभियानों में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया, तो मेलोनी को भी ट्रंप के गुस्से का सामना करना पड़ा। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में इटली की प्रधानमंत्री ने पोप लियो XIV पर ट्रंप के हमलों की आलोचना करते हुए उन्हें "अस्वीकार्य" बताया, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इस घटना से पता चला कि ट्रंप की नाराज़गी से वे नेता भी नहीं बच पाते जिन्हें स्वाभाविक सहयोगी माना जाता है।
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची काफी हद तक ट्रंप की आलोचना का बार-बार शिकार बनने से बची रही हैं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ट्रंप के साथ निजी तालमेल बनाने की खास कोशिश की है, जिसमें दिवंगत शिंजो आबे के प्रति दोनों की आपसी पसंद ने मदद की है। हालांकि, ईरान युद्ध का समर्थन न करने के जापान के फैसले को लेकर तनाव पैदा हो गया।