Trump ने बताया 'प्रभावशाली', फिर क्यों White House से चुपचाप निकले Lula? मीटिंग पर सस्पेंस गहराया

By अभिनय आकाश | May 09, 2026

ब्राजील के राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की ताकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को कम किया जा सके। हालांकि, विश्व नेताओं के लिए प्रचलित प्रथा के विपरीत, उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग नहीं लिया। व्हाइट हाउस में मौजूद लोगों ने ब्राज़ीलियाई पत्रकारों की व्हाइट हाउस से निकलते हुए तस्वीरें शेयर की। लूला संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हुए थे। MAGA समर्थकों के एक समूह ने अटकलें लगाईं कि लूला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसलिए हिस्सा नहीं लिया क्योंकि ट्रंप के साथ उनकी मुलाकात गहमा-गहमी भरी रही होगी। 

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ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लूला को प्रभावशाली शख्स बताया तो लूला ने लिखा कि 3 घंटे चली इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों की बेहतरी की दिशा में काम हुआ। दोनों नेताओं की इस मीटिंग पर सबकी निगाहें थीं। वामपंथी लूला और दक्षिणपंथी ट्रंप के बीच तनातनी देखने को मिली थी। खासतौर पर पिछले साल अमेरिका ने ब्राजील पर टैरिफ लगाया तो रिश्ते असहज हुए थे।

एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अक्टूबर में ब्राजील में चुनाव हैं और लूला के सामने उसे लेकर चुनौतियां हैं। वह पिछले साल की तरह अमेरिकी की टैरिफ नीति के खिलाफ ग्लोबल साउथ देशों को लेकर चलाए गए अभियान से भी बचना चाहेंगे। पश्चिम एशिया के संकट की वजह से जियो पॉलिटिक्स के हालात अलग है और लूला इस वक्त ट्रंप से सीधे तौर पर टकराना नहीं चाहेंगे। ट्रंप ने पिछले साल जब टैरिफ लगाया था तब लूला ने कहा था कि ट्रंप दुनिया के शंहशाह नहीं हैं।

ब्रिक्स लीडर्स समिट में भारत आ सकते है लूला

सितंबर में भारत में ब्रिक्स लीडर्स समिट होनी है। बतौर ब्रिक्स सदस्य ब्राजील के राष्ट्रपति नई दिल्ली आ सकते है। ब्रिक्स देशों के इस बार के एजेंडे को लेकर अभी भी शेरपा स्तर की बैठके हो रही है। दरअसल इन राजनयिक वार्ताओ में सदस्य देशों के सीनियर प्रतिनिधि मिलते है और समिट का एजेंडा तैयार करने और उस पर सहमति बनाने की कोशिशे की जाती है। पिछली समिट में साझा ब्रिक्स करेंसी को लेकर चर्चाए हुई थी, लेकिन इसमें कई तरह की दिक्कतें और विरोध सामने पेश आए थे। भारत ने हमेशा ही डि-डॉलराइ‌जेशन का विरोध किया है। नई दिल्ली की हमेशा ही ये कोशिशें रही कि वह G-7 और ब्रिक्स के बीच एक संतुलन बनाए रखे। इस बार भी इस तरह के मुद्दो पर चर्चा होगी, इसकी संभावना ताजा हालातों में कम ही लगती है।

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