Donald Trump की लोकेशन हुई ट्रेक! Russia- Iran का 'सीक्रेट इंटेलिजेंस पैक्ट', मास्को-तेहरान मिलकर मचाएंगे तबाही

By रेनू तिवारी | Mar 07, 2026

वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। दावा किया जा रहा है कि रूस और ईरान के बीच एक गुप्त समझौता (Secret Deal) हुआ है, जिसके तहत रूस न केवल घातक मिसाइलें प्रदान कर रहा है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेना और संपत्तियों की 'रियल-टाइम लोकेशन' साझा करने में भी मदद कर रहा है। एक हालिया और चौंकाने वाले खुलासे में, दो उच्च पदस्थ अधिकारियों ने दावा किया है कि रूस ने ईरान को संवेदनशील खुफिया जानकारी साझा की है। इस जानकारी का उपयोग क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि रूस, ईरान को दी गयी जानकारी के संबंध में क्या निर्देश दे रहा है। उन्होंने कहा कि फिर भी, ऐसे संकेत हैं कि रूस ने उस युद्ध में शामिल होने की कोशिश की है जिसे अमेरिका और इजराइल ने एक सप्ताह पहले ईरान के खिलाफ शुरू किया था। रूस उन कुछ देशों में से एक है जिनके ईरान के साथ दोस्ताना संबंध हैं।

रूस-ईरान की खुफिया जुगलबंदी: मुख्य खुलासे

हालिया खुफिया रिपोर्ट्स और अधिकारियों के हवाले से कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं:

टारगेट ट्रैकिंग: अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, रूस ने ईरान को ऐसी संवेदनशील जानकारी दी है जिससे उसे क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य ठिकानों को सटीक तरीके से ट्रैक करने में मदद मिल रही है।

हथियार डील: खबरों के अनुसार, दोनों देशों के बीच लगभग 500 मिलियन यूरो की एक गुप्त डील हुई है। इसके तहत रूस ईरान को 500 'वर्बा' (Verba) लॉन्च यूनिट और 2500 घातक मिसाइलें सौंपने वाला है।


सैटेलाइट सपोर्ट: यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि रूसी सैटेलाइट्स चौबीसों घंटे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं और यह डेटा सीधे तेहरान को भेजा जा रहा है।

रूस द्वारा ईरान को प्रदान की गई यह खुफिया जानकारी न केवल युद्ध की आग में घी डालने का काम कर सकती है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया और खतरनाक मोर्चा खोल सकती है। जैसे-जैसे अमेरिका और इजराइल अपनी रणनीतियों को पुख्ता कर रहे हैं, रूस का यह कदम एक स्पष्ट संदेश है कि वह अपने सहयोगियों के साथ खड़ा है, चाहे इसके लिए उसे सीधे टकराव का जोखिम ही क्यों न उठाना पड़े। 

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