By अभिनय आकाश | Sep 08, 2025
दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को अपने टैरिफ रूपी हथियार से झुकाने का ख्वाब देखने वाले अमेरिका को अब उसकी नीतियां ही भारी पड़ रही है। अब अमेरिकी सरकार पर ही अरबों डॉलर वापस लौटाने का खतरा मंडरा रहा है और इसका फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में होने वाला है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस की कमान दोबारा संभालने के बाद अपने इस कार्यकाल में आक्रमक नीति अपनाई। उन्होंने रेसिप्रोकल टैरिफ यानी की प्रतिशोधात्मक शुल्क का सहारा लेते हुए 180 से ज्यादा देशों पर 10 % से 50 % तक के टैरिफ लगाए। इसमें भारत, चीन, कनाडा, ब्राजील जैसे बड़े देश शामिल थे। अकेले भारत पर अगस्त 2025 में दो बार टैरिफ बढ़ाए गए। 7 अगस्त को 25 % और 27 अगस्त को 50 % कर दिए गए। ट्रंप का दावा था कि इससे अमेरिका को फायदा होगा और विदेशी कंपनियां झुक जाएंगी।
बेसेंट ने कहा कि हमें लगभग आधे टैरिफ पर रिफंड देना होगा, जो ट्रेजरी के लिए भयानक होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रशासन उन पुनर्भुगतानों को जारी करने के लिए तैयार है, तो उन्होंने स्वीकार किया कि अगर अदालत ऐसा कहती है, तो हमें ऐसा करना होगा। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें विश्वास है कि ट्रम्प प्रशासन जीत जाएगा। बेसेन्ट की यह टिप्पणी दो संघीय न्यायालयों द्वारा यह पाये जाने के बाद आई है कि ट्रम्प के पास 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के तहत व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
अगस्त में नए टैरिफ लागू होने के बाद से, अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग ने 70 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की राशि एकत्र की है, जो इस साल एकत्रित 180 अरब अमेरिकी डॉलर के टैरिफ राजस्व के आधे से भी कम है। बेसेन्ट ने चेतावनी दी है कि अगर मुक़दमेबाज़ी 2026 के मध्य तक चलती है, तो कुल रिफंड 750 अरब अमेरिकी डॉलर से 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच हो सकता है, जिससे अमेरिकी वित्त में "काफी व्यवधान" पैदा हो सकता है।