ईरान की तारीफ, टूट जाएगा NATO, जर्मनी पर ऐसे भड़ास निकालेंगे ट्रंप

By अभिनय आकाश | May 02, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट ने अटलांटिक के दोनों किनारों पर राजनीतिक भूकंप ला दिया। ट्रंप ने जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों को कम करने या उन्हें पूरी तरह वापस बुलाने की संभावना जताकर पेंटागन और नाटो सहयोगियों को गहरे संकट में डाल दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष ने वैश्विक शक्तियों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संभावित फैसले की जानकारी स्वयं पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों को भी नहीं थी। रिपोर्ट्स के अनुसार सैन्य अधिकारियों को ट्रंप के ट्रुथ सोशल पोस्ट के बाद ही इस योजना का पता चला। हाल ही में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने दुनिया भर में तैनात अमेरिकी बलों की व्यापक समीक्षा की थी। जिसमें यूरोप से सैनिकों को हटाने का कोई उल्लेख नहीं था। पेंटागन के एक सूत्र ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि हमारा ध्यान ईरान के मोर्चे पर केंद्रित था। जर्मनी से पीछे हटना हमारी रणनीतिक गणना का हिस्सा नहीं था। इस कूटनीतिक दरार की शुरुआत जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिस मे्स के एक कड़े बयान से हुई। 

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इसकी अनुपस्थिति में नेटो की त्वरित कार्रवाही की क्षमता आधी रह जाएगी। इसके अलावा पोलैंड और बाल्टिक देशों जैसे पूर्वी यूरोपीय देश जो रूस को एक बड़े खतरे के रूप में देखते हैं वे खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे। यूरोप की रणनीतिक स्वायता खतरे में पड़ सकती है और अगर अमेरिका ने 38,000 सैनिक वापस बुलाए तो इससे नाटो का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। 

अमेरिका के पीछे हटने से नेटो की प्रासंगिकता पर सवाल उठेंगे। अगर गठबंधन का सबसे बड़ा साझेदार ही अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटता है तो सामूहिक सुरक्षा का सिद्धांत यानी आर्टिकल फाइव कमजोर पड़ जाएगा। जर्मनी के कई शहर जैसे स्टगार्ड और कैसलॉटन अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर आर्थिक रूप से निर्भर है। सैनिकों की वापसी से वहां के स्थानीय व्यवसायों को अरबों डॉलर का नुकसान होगा। दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की अनुपस्थिति रूस और चीन जैसे देशों को यूरोप में अपना प्रभाव बढ़ाने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी। विश्लेषकों का एक वर्ग इसे ट्रंप की पुरानी प्रेशर टैक्टिक्स मान रहा है। जिसका उद्देश्य यूरोपीय देशों को रक्षा बजट बढ़ाने और ईरान के मुद्दे पर अमेरिका का साथ देने के लिए मजबूर करना है। हालांकि जिस तरह से ट्रंप ने पेंटागन को दरकिनार कर यह बयान दिया है उससे यह साफ है कि वे इस बार केवल चेतावनी नहीं दे रहे बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने का मन बना चुके हैं। देखना यह होगा कि जर्मनी से सैनिकों को कम करने या वापस बुलाने के फैसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगे क्या बयान देते हैं और आगे क्या फैसला लेते हैं। 

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