By Ankit Jaiswal | Jul 22, 2026
भारतीय मुद्रा बाजार में बुधवार को कमजोरी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा। इसके साथ ही घरेलू शेयर बाजार में आई गिरावट और वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता का असर भी रुपये पर साफ दिखाई दिया।
गौरतलब है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का प्रमुख मानक ब्रेंट क्रूड चार प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ लगभग 94.92 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि लाल सागर और होरमुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
इस बीच घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। सेंसेक्स 715.06 अंक गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 191.45 अंक की गिरावट के साथ 23,996.25 पर पहुंच गया। हालांकि सकारात्मक पहलू यह रहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में 1,650.16 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेश के रुख पर निर्भर रहेगी।