दलित बहनों के शव मामले में परिजनों का आरोप, बच्चियों की बलात्कार के बाद की गई हत्या

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 17, 2020

फतेहपुर। फतेहपुर जिले के एक गांव के तालाब से सोमवार को बरामद दो नाबालिग दलित बहनों के शव के मामले में परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्चियों की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई है, वहीं पुलिस से हादसा बता रही है। फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रशांत वर्मा ने शवों के पोस्टमॉर्टम से पहले पुलिस की सोशल मीडिया अकाउंट से दो बयान (वीडियो) जारी किए हैं। पहले बयान में उन्होंने कहा है, ‘‘दोनों सगी नाबालिग बहनें तालाब से सिंघडा निकालने गयी थीं, जहां गहरे पानी में डूबने से उनकी मृत्यु हुई है।’’ 

उनकी मां का कहना है, ‘‘शवों को उनके चाचा लक्ष्मीकांत और मुहल्ले के तीन-चार युवकों ने मिलकर तालाब से बाहर निकाला था। उस समय तक पुलिस नहीं पहुंची थी। बाद में पुलिस घर आयी और बिना पंचनामा भरे दोनों शवों को जबरन पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।’’ बच्चियों के चाचा लक्ष्मीकांत ने आरोप लगाया है, ‘‘वह रात में फोन से घटना की जानकारी जिलाधिकारी को दे थे, तभी एक पुलिसकर्मी ने उसे घसीटकर अन्य पुलिसकर्मियों के हवाले कर दिया और किसी से कुछ नहीं बताने की हिदायत दी। इस दौरान पुलिस ने उससे जबरन पानी में डूबने से बच्चियों की मौत लिखवाया है।’’ 

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उसने आरोप लगाया है, ‘‘उसके साथ जिन तीन अन्य युवकों ने शवों को पानी से निकाल कर घर लाने में मदद की थी, पुलिस ने उन्हें रात भर हिरासत में रखा, ताकि वह सच्चाई ना बता सकें।’’ लक्ष्मीकांत ने पुलिस के इस दावे कि ‘बच्चियों की आंख में सिंघाड़े के कांटों से चोट लगने के निशान हैं और पानी में डूबने से मौत हुई है।’ पर सवाल करते हुए कहा ‘‘यदि सिंघाड़े के कांटों से आंख और सिर पर चोट पहुंची हैं तो कांटों से चेहरे या अन्य अंगों पर चोट क्यों नहीं लगी?’ उसने सीधे तौर पर पुलिस पर आरोप लगाया है ‘‘पुलिस अपराधियों को बचा रही है और बलात्कार के बाद बच्चियों की हत्या की गई है।’’ लक्ष्मीकांत और कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, ‘‘खेत से बच्चियों ने जो चने का साग तोड़ा था, वह खेत की मेड़ में बिखरा पड़ा था, जिससे साफ है कि संघर्ष के दौरान चने का साग बिखर गया होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर बच्चियां सिंघडा तोड़ने के लिए तालाब उतरी थीं तो चने का साग तालाब के किनारे कपड़े में बंधा रखा होना चाहिए था, जबकि साग मेड़ में बिखरा था।’’ उधर, असोथर थाने के प्रभारी निरीक्षक रणजीत बहादुर सिंह ने बताया, ‘‘जिस तालाब से बच्चियों के शव बरामद हुए हैं, उसकी गहराई आठ से दस फीट है।’’ उन्होंने बच्चियों के चाचा या अन्य किसी को हिरासत में लेने के आरोप को गलत बताया। परिजनों ने सोशल मीडिया में उस तालाब का वीडियो भी डाला है, जिससे बच्चियों के शव बरामद हुए हैं। वीडियो में जो तालाब दिख रहा है, उसमें बमुश्किल डेढ़ से दो फीट गहरा पानी और कुछ सिंघाड़े के पौध दिखाई दे रहे हैं। गौरतलब है कि असोथर थाना क्षेत्र के एक गांव में सोमवार देर रात जंगल में स्थित एक तालाब से दलित वर्ग की आठ और 12 साल की दो सगी बहनों के संदिग्धावस्था में पानी में तैरते हुए शव बरामद हुए थे। दोनों बच्चियां सोमवार दोपहर खेतों में चने का साग तोड़ने गयी थीं।

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