Bhilwara के Mahatma Gandhi Hospital में दो और प्रसूताओं की मौत, जांच के आदेश जारी

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 31, 2026

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में दो और प्रसूताओं की मौत हो गई। इसके साथ ही इस सरकारी अस्पताल में अलग-अलग कारणों से सात प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि कोटड़ी इलाके की निवासी सुगना मोहन बैरवा (22) को प्रसव के बाद गंभीर हालत में शाहपुरा से स्थानांतरित किया गया था। गौड़ ने बताया कि बैरवा को गंभीर सदमे की हालत में गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती किया गया था। उसका ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था और हीमोग्लोबिन का स्तर गंभीर एनीमिया का संकेतक था।

गौड़ ने कहा कि विशेषज्ञों की टीम द्वारा इलाज के बावजूद गंभीर सदमे और एनीमिया के कारण बैरवा की मौत हो गई। दूसरी महिला पटेल नगर की रानी भूरा बंजारा (18) ने महात्मा गांधी अस्पताल में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। गौड़ ने बताया कि प्रसव के तुरंत बाद बंजारा को दौरे पड़े और फिर बहुत ज़्यादा रक्तस्राव होने लगा।

उन्होंने बताया कि मेडिकल जांच में डी-डाइमर का स्तर असामान्य पाया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि दोनों मामलों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि किसी भी महिला की गर्भावस्था को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में नहीं रखा गया था।

वे मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए प्रसव-पूर्व देखभाल के रिकॉर्ड, अस्पताल के दस्तावेज, सोनोग्राफी रिपोर्ट और अन्य संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड इकट्ठा कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि मौत का सही कारण अभी पता नहीं चल पाया है और जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, ‘‘भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में दो प्रसूताओं की मौत की खबर अत्यंत हृदयविदारक और सरकार की घोर संवेदनहीनता का प्रमाण है।

जूली ने एक बयान में कहा, ‘‘पिछले दिनों कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत, बीकानेर में दो मौत, भीलवाड़ा में सात प्रसूताओं की मौत, बांसवाड़ा में दो प्रसूताओं की मौत और जोधपुर सहित विभिन्न जिलों में जब कोई मां प्रसव के लिए अस्पताल जाती है और उसकी अर्थी घर लौटती है। यह केवल प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि राज्य सरकार के माथे पर कलंक है।’’ उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था अब वेंटिलेटर पर नहीं, बल्कि कोमा में पहुंच चुकी है।

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