By अभिनय आकाश | May 12, 2026
बीती रात जब दिल्ली सो रही थी तब इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर एक ऐसी हलचल हुई जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में सनसनी मचा दी। दिल्ली एयरपोर्ट की रैंप पर खड़ा था यूएई वायुसेना का महाबली बोइंग C17 ग्लोब मास्टर 3। चार धधकते हुए इंजन, 51 मीटर से ज्यादा चौड़े पंख और 77 टन पेलोड ले जाने की क्षमता रखने वाला यह विमान भारत की धरती पर उतरा। यह कोई सामान्य लैंडिंग नहीं थी। यह लैंडिंग ठीक उस वक्त हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूएई दौरे पर निकलने वाले हैं। दरअसल मित्रता की असली परीक्षा संकट के समय होती है। पिछले कुछ हफ्तों में मिडिल ईस्ट का माहौल गमाया हुआ है। ईरान ने यूएई के फुजेरा पेट्रोलियम जोन पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। जिसमें ना केवल संपत्ति का नुकसान हुआ बल्कि तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने की खबर भी सामने आई जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी। अब यूएई को अपनी डिफेंस इन्वेंटरी को तुरंत रिफिल करने की जरूरत थी और ऐसे समय में उसने दुनिया के किसी और देश की तरफ नहीं बल्कि भारत की तरफ देखा। आधिकारिक पुष्टि भले ही नहीं हो लेकिन रणनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली में उतरे इस विमान में भारत की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोट भारत डायनामिक्स और एलएटी द्वारा निर्मित घातक डिफेंस सप्लाई लोड की गई है और यह संदेश साफ दे दिया गया है कि अगर यूएई की सुरक्षा पर आंच आएगी तो भारत हाथ पर हाथ रखे नहीं बैठेगा।
भारत और यूएई के बीच का रिश्ता आज 100 बिलियन डॉलर के व्यापार को पार कर चुका है। 35 लाख भारतीय भाई-बहन यूएई की तरक्की में पसीना बहा रहे हैं। मेहनत कर रहे हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा का 25% हिस्सा यूएई से आता है। लेकिन अब यह रिश्ता संबंध सिर्फ तेल और रेमिटेंस तक सीमित नहीं है। अब यह रिश्ता टैंक, मिसाइल और रणनीतिक सुरक्षा का बन चुका है। वैसे आपको बता दें कि भारत और यूएई के बीच पनप रही यह नई डिफेंस केमिस्ट्री केवल कूटनीति नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों का एक बड़ा संकेत है क्योंकि भारत के हथियारों की धमक पूरी दुनिया में है और यूएई भी भारत से हथियार मांग रहा है। ऐसे में क्या भारत अपने तीन सबसे घातक हथियार ब्रह्मोस आकाश और पिनाका यूएई को सौंप सकता है? यह भी समझ लेते हैं। देखिए सबसे पहले बात समंदर के सिकंदर ब्रह्मोस की। दोस्तों, ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल है। इसकी 2.8 मैग की रफ्तार इसे किसी भी रडार की पकड़ से बाहर और किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अजय बनाती है।