ठाकरे ने राज्यपाल की परीक्षा सम्बन्धी मांग को ठुकराकर दिखाई हिम्मत: शिवसेना

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 02, 2020

मुंबई। शिवसेना ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मौजूदा परिस्थिति में ही कॉलेजों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित कराने पर जोर दिया लेकिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह मांग ठुकराकर अपनी ‘‘शैली’’ का परिचय दिया है। सत्तारूढ़ शिवसेना ने कहा कि कोविड-19 से पैदा हुई स्थितियों की वजह से मौजूदा समय में परीक्षाएं आयोजित करना संभव नहीं है। कोविड-19 महामारी को नियंत्रण में करने के लिए मार्च में लागू हुए लॉकडाउन का हवाला देते हुए शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा कि लोगों ने दो महीने तक कड़ाई से ‘कैद’ (आवाजाही पर प्रतिबंध) का सामना किया। 

‘सामना’ में कहा गया कि राज्य की ठाकरे सरकार ने बंद में एक निश्चित हद तक रियायत दी है लेकिन लोगों से संयम बनाए रखने को कहा है ताकि महामारी को नियंत्रण में रखा जा सके। मुखपत्र में कहा गया है कि फिलहाल जीवन की दिशा बिल्कुल बदल गई है और लोगों की अनुशासनहीनता पर लगाम लगेगा क्योंकि अनुशासन का पालन नहीं करने पर जीवन का खतरा पैदा हो सकता है। शिवसेना ने कहा कि राज्यपाल कोश्यारी ने डिग्री पाठ्यकम के अंतिम वर्ष की परीक्षा आयोजित करने पर जोर दिया और मुख्यमंत्री ने उनकी मांग को ठुकराते हुए दिखा दिया कि ठाकरे इसी हिम्मत के लिए जाने जाते हैं। मौजूदा परिस्थितियों में विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष की परीक्षाएँ आयोजित करना संभव नहीं है।

 मुखपत्र में कहा गया कि कॉलेजों में आयोजित सेमेस्टर परीक्षाओं के आधार पर छात्राओं को उत्तीर्ण माना जा सकता है। ठाकरे नीत पार्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अकादमिक सत्र जून से शुरू होगा। पार्टी ने कहा, ‘‘ इसका मतलब यह है कि उन जिलों में स्कूल खुलेंगे जहां कोरोना वायरस का प्रसार नहीं हुआ है।’’ पार्टी ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से दुकानें खुलेंगी और फिलहाल मंदिर बंद रहेंगे। शिवसेना ने लोगों से बाजार या दुकान जाते समय साइकिल का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। मुखपत्र में कहा गया कि कोरोना वायरस संकट अभी खत्म नहीं हुआ है इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोग गैरजिम्मेदाराना व्यवहार नहीं रख सकते हैं। सामना में अमेरिका का हवाला देते हुए कहा गया कि वहां आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए छूट दी गई और लोग उसके साथ आगे बढ़े लेकिन यह कदम सही साबित नहीं हुआ। 

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मराठी में प्रकाशित होने वाले सामना में कहा गया कि ठाकरे सरकार ने कुछ निश्चित गतिविधियों को शुरू करने के लिए सीमित मात्रा में ऑक्सीजन दिया है लेकिन लोगों को धीरे-धीरे आगे बढ़ना होगा। सामना में कहा गया कि स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक ने अंग्रेजों के समय जेल से रिहा होने के बाद केसरी अखबार के लिए दोबारा काम शुरू करने से पहले ‘पुनश्च हरिओम (दोबारा गतिविधियां शुरू होना)’ कहा था। सार्वजनिक जीवन को पटरी पर लाने के लिए ठाकरे सरकार ने भी बंद में कुछ छूट देकर ‘पुनश्च हरिओम’ कहा है। पार्टी ने कहा कि लोगों को प्रतिबंध में छूट के बाद अनुशासनहीनता नहीं दिखाना चाहिए। लोगों को किसी को ‘हरि ओम’ के बदले ‘हे राम’ कहने का मौका नहीं देना चाहिए इसलिए ‘पुनश्च हरि ओम’ का स्वागत करें।

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