UltraTech Cement को Jaisalmer में नई खनन परियोजना के पहले चरण की मिली मंजूरी

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 21, 2026

अल्ट्राटेक सीमेंट लि. ने जैसलमेर के जोगा गांव में प्रस्तावित नई चूना पत्थर खनन परियोजना के लिए मंजूरी प्रक्रिया का पहला चरण पार कर लिया है। कंपनी राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले में अपनी खनन परियोजना में पर्यावरण अनुपालन और अन्य नियमों के उल्लंघन के आरोपों का सामना कर रही है। प्रस्तावित खनन परियोजना 400 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली है और इसमें पत्थर तोड़ने की इकाई भी शामिल है।

इनमें पानी का छिड़काव कर धूल को नियंत्रित करना, पत्थर तोड़ने वाली इकाई में बैग फिल्टर लगाना और आसपास के क्षेत्रों में बाधाओं को कम करना शामिल है। हालांकि, कोटपूतली-बहरोड़ के जोधपुर-मोहनपुर गांव में कंपनी की 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली चूना पत्थर खनन परियोजना में पर्यावरण और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए नुकसान कम करने के उपाय नहीं करने के आरोप लगे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की मध्य क्षेत्र पीठ ने नवंबर, 2025 में निजी कंपनी को गांव में पर्यावरणीय नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी खतरों के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

एनजीटी ने अल्ट्राटेक सीमेंट को रात में विस्फोट करने का काम बंद करने, पत्थर तोड़ने वाले क्षेत्र को तिरपाल से ढकने, संपर्क मार्गों पर पानी का छिड़काव करने तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए बैग फिल्टर, वैक्यूम सक्शन यानी धूल खींचने वाले उपकरण और सूक्ष्म जल-कुहासा प्रणाली का इस्तेमाल करने का आदेश दिया था। इन आरोपों पर कंपनी की प्रतिक्रिया अभी नहीं मिली है। नवीनतम परियोजना को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने 10 सितंबर को नियम एवं शर्तें जारी करने की मंजूरी देने की सिफारिश की।

नियम एवं शर्तें एक औपचारिक दस्तावेज है, जो किसी प्रस्तावित परियोजना के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययन के दायरे, उद्देश्यों, कार्यप्रणाली और रिपोर्टिंग संबंधी आवश्यकताओं को तय करता है। समिति की बैठक के ब्योरे के अनुसार, प्रस्तावित परियोजना में चूना पत्थर उत्पादन की क्षमता सालाना 10 लाख टन और पत्थर तोड़ने वाली इकाई की क्षमता 1,500 टन प्रति घंटा होगी। ईएसी ने कंपनी को दी गई सिफारिशों में गोडावण संरक्षण योजना तैयार करने को कहा है।

इसमें परियोजना को लेकर नुकसान से बचने के उपाय, घासभूमि के आवास का संरक्षण और प्रबंधन, प्रजनन क्षेत्र की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था, संस्थागत प्रबंध और बजट का प्रावधान शामिल होना चाहिए। परियोजना के प्रस्तावक को संरक्षण क्षेत्र और उसके आसपास चराई, वाहनों की आवाजाही, मानवीय हस्तक्षेप, कचरा निपटान तथा अन्य गतिविधियों से होने वाले मानवीय बाधाओं को नियंत्रित करने की योजना तैयार करने को भी कहा गया है।

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