By Ankit Jaiswal | Sep 03, 2026
सोशल मीडिया पर हुआ एक हल्का-फुल्का मजाक इन दिनों भारतीय ऑनलाइन शिक्षा क्षेत्र की एक बड़ी कहानी की ओर फिर ध्यान खींच रहा है। हास्य कलाकार समय रैना ने अनएकेडमी के सह-संस्थापक गौरव मुंजाल को कंपनी की बिक्री पर बधाई देते हुए चुटकी ली कि उन्होंने अपनी कंपनी को करीब 20 करोड़ डॉलर में बेच दिया, जबकि कुछ साल पहले इसका मूल्य 340 करोड़ डॉलर से ज्यादा था। गौरव मुंजाल ने भी जवाब में मजाकिया अंदाज अपनाते हुए कहा कि ऐसे दोस्तों के रहते दुश्मनों की जरूरत ही क्या है। लेकिन इस बातचीत के पीछे भारतीय शिक्षा प्रौद्योगिकी उद्योग के उतार-चढ़ाव की एक बड़ी कहानी छिपी है।
गौरतलब है कि अनएकेडमी की कहानी किसी बड़े कारोबारी निवेश से नहीं, बल्कि गौरव मुंजाल के एक वीडियो चैनल से शुरू हुई थी। वर्ष 2010 में शुरू हुआ यह प्रयास पांच साल बाद एक व्यवस्थित ऑनलाइन शिक्षा मंच में बदल गया। गौरव मुंजाल के साथ रोमन सैनी और शिक्षक उद्यमी हेमेश सिंह इसके प्रमुख संस्थापकों में शामिल रहे।
रोमन सैनी की यात्रा ने भी इस मंच को अलग पहचान दिलाई। उन्होंने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से चिकित्सा शिक्षा हासिल की। इसके बाद वर्ष 2013 की संघ लोक सेवा परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 18वां स्थान हासिल किया और भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए। मध्य प्रदेश के जबलपुर में सहायक कलेक्टर के रूप में काम करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का फैसला किया।
उस दौर में संघ लोक सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए दिल्ली के मुखर्जी नगर और पुराने राजेंद्र नगर जैसे इलाकों में महंगी कोचिंग पर निर्भरता काफी ज्यादा थी। अनएकेडमी ने इंटरनेट के जरिए मुफ्त पढ़ाई उपलब्ध कराकर इसी व्यवस्था को चुनौती दी। शुरुआत में मंच पर मुफ्त वीडियो के माध्यम से अलग-अलग विषयों और परीक्षाओं की तैयारी कराई गई। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में शिक्षक इससे जुड़े और लंबे समय तक चलने वाली कक्षाओं के जरिए विद्यार्थियों को पढ़ाने लगे।
बाद में कंपनी ने शुल्क आधारित कक्षाएं, तय पाठ्यक्रम, मार्गदर्शन और शिक्षकों से सीधे संवाद जैसी सेवाएं भी शुरू कीं। वजिराम एंड रवि, विजन आईएएस और राउज आईएएस जैसे संस्थानों से जुड़े कई शिक्षक भी अलग-अलग समय में इस मंच का हिस्सा बने। रोमन सैनी ने एक समय बताया था कि शुरुआती दौर में इंटरनेट पर पढ़ाने के लिए अच्छे शिक्षकों को तैयार करना आसान नहीं था। टीम को इसके लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों से संपर्क करना पड़ा।
इसके बाद अनएकेडमी ने प्रतियोगी परीक्षाओं से आगे बढ़कर शिक्षा के व्यापक बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश की। कोविड महामारी ने इस विस्तार को और गति दी। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान बंद होने के कारण विद्यार्थियों के पास ऑनलाइन पढ़ाई एक प्रमुख विकल्प बन गई। कंपनी के अनुसार उस समय हर महीने एक लाख से ज्यादा सीधी कक्षाएं होती थीं और करीब दस लाख भुगतान करने वाले विद्यार्थी मंच से जुड़े थे।
इस दौर में अनएकेडमी से जुड़े शिक्षकों की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी। शिक्षक अमित किल्होर के अनुसार, मंच ने शिक्षकों की कमाई और सामाजिक पहचान दोनों को बदलने में भूमिका निभाई। मुफ्त मंच पर मौजूद वीडियो को अरबों बार देखा गया और कई शिक्षक देशभर में जाने-पहचाने चेहरे बन गए।
कंपनी ने शिक्षा से बाहर भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की। विराट कोहली, मैरी कॉम, शशि थरूर और किरण बेदी जैसी चर्चित हस्तियों के साथ विशेष कार्यक्रम किए गए। टेलीविजन फ्रेमवर्क के साथ मिलकर कोटा फैक्ट्री, एस्पिरेंट्स और संदीप भैया जैसी प्रस्तुतियों से जुड़ी साझेदारियां भी हुईं। संगीत आधारित कार्यक्रमों के जरिए भी कंपनी ने अपनी पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया।
लेकिन महामारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा उद्योग का माहौल तेजी से बदला। विद्यार्थियों की बड़ी संख्या वापस पारंपरिक कक्षाओं की ओर लौटी और कंपनियों पर खर्च तथा लाभ के बीच संतुलन बनाने का दबाव बढ़ा। वर्ष 2021 में अनएकेडमी ने करीब 44 करोड़ डॉलर जुटाए थे और उसका मूल्यांकन 344 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया था। चार साल के भीतर अब वही कंपनी करीब 20.6 करोड़ डॉलर के सौदे तक पहुंच गई है।
गौरव मुंजाल ने भी मूल्यांकन में आई इस भारी गिरावट को स्वीकार किया है। उनका कहना है कि कंपनी ने ऊंचे मूल्यांकन के दौर में पूंजी जुटाई थी, लेकिन अब सौदा उस मूल्य के एक छोटे हिस्से पर हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने कंपनी की टीम द्वारा खड़े किए गए कारोबार पर गर्व जताया है।
उपग्रेड के सह-संस्थापक रोनी स्क्रूवाला के मुताबिक, दोनों कंपनियों के बीच साथ आने की बातचीत करीब छह साल पहले शुरू हुई थी। वर्ष 2020 में मुंबई में हुई एक मुलाकात के दौरान गौरव मुंजाल ने संभावित विलय को लेकर बातचीत की थी।
मुंजाल के अनुसार, सौदे से पहले अनएकेडमी का कारोबार करीब 400 करोड़ रुपये का था और कंपनी के पास लगभग 900 करोड़ रुपये की नकदी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि कंपनी के ज्यादातर कारोबार लाभ में थे या लाभ के करीब पहुंच चुके थे और यह सौदा किसी दबाव में नहीं किया गया।
बता दें कि किसी कंपनी का मूल्यांकन उसके पूरे प्रभाव को नहीं बताता। अनएकेडमी ने भारत में ऑनलाइन शिक्षा को बड़े पैमाने पर लोकप्रिय बनाने के साथ शिक्षकों को एक नया डिजिटल मंच दिया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के पारंपरिक तरीके को बदलने में भूमिका निभाई। आज उसका मूल्यांकन भले ही अपने शिखर से करीब 94 प्रतिशत नीचे हो, लेकिन भारतीय शिक्षा प्रौद्योगिकी के विकास में अनएकेडमी की कहानी अब भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है और उसके प्रभाव को केवल सौदे की रकम से मापना आसान नहीं है।