Digital Era में बढ़ती हुई Texting Anxiety: क्या रिप्लाई न मिलना आपकी Mental Health बिगाड़ रहा है?

By दिव्यांशी भदौरिया | Aug 05, 2026

आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट के जरिए टेक्सट मैसेजिंग से बातचीत करना बेहद आसान हो चुका है। अब हर कोई कहीं न कहीं चैट पर बिजी रहता है। इस दौरान कई लोग महसूस करते हैं कि किसी को मैसेज भेजने के बाद जब देर तक रिप्लाई नहीं आता, तो दिल की धड़कनें तेजी से बढ़ जाती हैं। जिससे व्यक्ति बार-बार फोन चेक करता है, एक अलग सी एंग्जायटी देखनो को मिलती है। सामने वाले व्यक्ति के Typing... स्टेटस का लगातार चेक करते रहना , हमेशा इंतजार में बनें रहते हैं या आप भी सोचते हैं कि कहीं आपने कुछ गलत तो नहीं लिख दिया है।

क्या होती है टेक्स्टिंग एंग्जायटी

अगर आप मैसेज के जरिए बातचीत करते समय घबराहट होने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण हो सकता है, आइए आपको इसके बारे में बताते हैं-

- हाव-भाव और टोन की कमी: असल में जब हम आमने-सामने बातचीत में चेहरे एक्सप्रेशन और टोन से बात का सही मतलब समझा जाता है। टेक्स्ट में यह सब गायब हो जाता है, जिससे कई बार गलतफहमी का डर बन जाता है।

- लगातार ऑनलाइन रहने का दबाव: अक्सर मैसेज आते रहते हैं और हर समय रिप्लाई करने की मजबूरी इंसान को दिमागी रुप से थका रही है।

- फोन का ज्यादा यूज करना: स्मार्टफोन का लगातार यूज करने से दिमाग में 'डोपामाइन' के स्तर को प्रभावित करता है, जिससे नोटिफिकेशन चेक करने की आदत एक लत बन जाती है।

 - सोशल एंग्जायटी और साइबर बुलिंग: जिन लोगों को पहले से ही घबराहट होती हैं या ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार रह चुके हैं, उन्हें मैसेज का जवाब देने का इंतजार करने में डर लगने लगता है।

टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण

 शारीरिक और मानसिक लक्षण

- मैसेज भेजने के बाद अचानक से दिल की धड़कन तेज होना या बैचेनी होना।

- लगातार चिड़चिड़ापन, घबराहट या हाथ-पैरों में कंपकंपी महसूस होना।

- सांस लेने में भारीपन या छाती में खिंचाव महसूस होना।

व्यावहारिक लक्षण

- नोटिफिकेशन न आने पर भी बार-बार फोन की स्क्रीन चेक करना।

- अनसोल्वड मैसेज देखकर डरना या मैसेज का जवाब देने से पूरी तरह बचना।

- किसी का देर से रिप्लाई करने पर खुद को दोषी मानना या लगातार ओवरथिंकिंग करते रहना।

मैसेज के स्ट्रेस को दूर कैसे करें?

- अधिक फोन का इस्तेमाल करने से बचें। दिन में कुछ घंटे ऐसे तय करें जब आप फोन से पूरी तरह दूर रहें।

- किसी भी गंभीर मुद्दे पर टेक्स्ट करने के बजाय फोन पर बात करें या मिलाकर बात करें। इससे गलतफहमी नहीं होती है। 

- दोस्तों और सहकार्मियों को साफ रुप से बताएं कि हर समय आप तुरंत रिप्लाई देने के लिए उपबल्ध नहीं रह सकते हैं।

- अगर किसी का रिप्लाई रूखा या देर से आए, तो यह न समझें कि वह आपसे नाराज है। क्या पता सामने वाला व्यक्ति काम में बिजी हो।

डॉक्टर या विशेषज्ञ से संपर्क कब करें?

जब घबराहट रोजाना काफी बढ़ जाए, ऑफिस के वर्क या पर्सनल रिश्तों को बुरी तरह प्रभावित होने लगे, तो आप किसी थेरेपिस्ट या काउंसलर की मदद लेना समझदारी है। दरअसल, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसी तकनीकों से इस डिजिटल स्ट्रेस को दूर करने में मदद मिल सकती है।  

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