By अभिनय आकाश | Oct 13, 2026
यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) के लेटेस्ट मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) से पता चलता है कि पाकिस्तान की 38 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी हेल्थकेयर, एजुकेशन और रहने-सहने की स्थितियों में कई तरह की कमियों का सामना कर रही है, जो देश के विकास में लगातार बनी हुई कमियों को उजागर करता है। 'डॉन' के मुताबिक, न्यूयॉर्क में UNDP की ओर से जारी आंकड़ों से पता चला कि पाकिस्तान के 38.3 प्रतिशत लोग मल्टीडायमेंशनल रूप से गरीब थे, जो बांग्लादेश के 14.9 प्रतिशत के मुकाबले काफी ज़्यादा है। हालांकि, ये अनुमान अलग-अलग सालों में किए गए घरेलू सर्वे पर आधारित हैं और इन्हें एक ही समय की स्थितियों की सीधी तुलना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। रिपोर्ट में पाया गया कि पाकिस्तान की मल्टीडायमेंशनल रूप से गरीब आबादी में अभाव की तीव्रता 51.7 प्रतिशत थी। इसके अलावा, 12.9 प्रतिशत आबादी को मल्टीडायमेंशनल गरीबी के प्रति संवेदनशील (vulnerable) माना गया, जिससे लोगों के गंभीर मुश्किलों में फंसने का व्यापक खतरा उजागर होता है।
वहीं, प्रभावित आबादी का 83 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण इलाकों में रहता है, जहां ज़रूरी सेवाओं तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जैसा कि 'डॉन' ने बताया है। दुनिया भर में अभाव या कमी का एक बड़ा हिस्सा दक्षिण एशिया में है। पोषण, आवास और स्कूली शिक्षा के मामले में दुनिया भर में जो कमियां हैं, उनमें इस क्षेत्र का हिस्सा कम से कम एक-तिहाई है। 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया में लगभग 15 करोड़ गरीब लोग ऐसे घरों में रहते हैं जहां स्कूल जाने की उम्र का कम से कम एक बच्चा स्कूल नहीं जा रहा है।