By अनन्या मिश्रा | Aug 11, 2026
पिछले कुछ सालों में हाई-प्रोटीन डाइट का ट्रेंड काफी तेजी से बढ़ा है। वेट कम करे, फिट रहने और मसल्स गेन करने के लिए लोग अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा को बढ़ा रहे हैं। दालें, अंडे, प्रोटीन शेक, चिकन और सप्लीमेंट का ज्यादा मात्रा में सेवन करने कुछ लोगों के लिए आम हो गया है। हालांकि हमारे शरीर के लिए प्रोटीन एक जरूरी पोषक तत्व है।
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो ज्यादा मात्रा में प्रोटीन लेने पर सेहत संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं। क्योंकि किसी भी चीज को बहुत ज्यादा या कम मात्रा में लेना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
अगर आपको नॉर्मल से ज्यादा पेशाब जाना पड़ता है। तो यह भी ज्यादा प्रोटीन लेने का संकेत हो सकता है। जब शरीर प्रोटीन को पचाता है, तो नाइट्रोजन वाले टॉक्सिक पदार्थ बनते हैं। जिनमें किडनी पेशाब के जरिए बाहर निकलती है। अधिक मात्रा में प्रोटीन लेने से किडनी को ज्यादा काम करना पड़ सकता है। जिससे पेशाब की मात्रा बढ़ सकती है।
वहीं अगर ज्यादा प्यास लगने की समस्या होती है, तो यह शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। इसलिए हाई प्रोटीन डाइट लेने वालों के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। हाई प्रोटीन डाइट से पेशाब में यूरिया की सांद्रता बढ़ जाती है। जोकि मूत्राशय की परत पर दबाव डालती है। इससे बॉडी में CRP जैसे मार्कर बढ़ते हैं। वहीं इससे मूत्राशय में सूजन की समस्या हो सकती है।
हमारे शरीर के लिए प्रोटीन एक जरूरी पोषक तत्व है। लेकिन जरूरत से ज्यादा प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट बहुत कम लेते हैं। तो शरीर में एनर्जी की कमी हो सकती है। कार्बोहाइड्रेट फूड्स आपके शरीर को एनर्जी देता है। ऐसे में ज्यादा प्रोटीन ज्यादा लेने से शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम हो जाती है। जिससे लोगों में सुस्ती, थकान और काम में मन न लगने जैसी समस्या महसूस हो सकती है। अगर आप हाई प्रोटीन डाइट शुरू करने के बाद भी लगातार सुस्ती महसूस करते हैं, तो आपको अपनी डाइट का संतुलन चेक करना चाहिए।
हाई-प्रोटीन डाइट में फाइबर की मात्रा कम हो जाती है। खासकर जब लोग साबुत अनाज, दालों, फल और सब्जियों की जगह सिर्फ एनिमल बेस्ड प्रोटीन पर अधिक निर्भर होते हैं। तो फाइबर की कमी से पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है। जिस कारण ब्लोटिंग, कब्ज और मल त्याग करने में मुश्किलें जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में अगर आपकी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ गई है, तो इसके साथ पर्याप्त मात्रा में फाइबर का सेवन और पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।
अक्सर लोगों को लगता है कि अधिक मात्रा में प्रोटीन खाने से सिर्फ वेट कम होगा, ऐसा नहीं होता है। अगर आप शरीर की जरूरत के हिसाब से ज्यादा कैलोरी ले रहे हैं। फिर चाहे वह प्रोटीन से ही क्यों न आए, तो अधिक एनर्जी शरीर में फैट के रूप में जमा हो सकता है। इसके अलावा प्रोटीन बार, सप्लीमेंट्स और शेक में अधिक चीनी और कैलोरी भी होती है। जोकि वेट गेन की वजह बन सकती है। इसलिए सिर्फ हाई-प्रोटीन के लेबल वाले प्रोडक्ट्स को अपनी डाइट में शामिल करने से बचना चाहिए। बल्कि इन प्रोडक्ट में कैलोरी भी चेक करें। मध्यम उम्र और बुजुर्गों के लंबे समय तक ज्यादा प्रोटीन खाने से वेट गेन का जोखिम बढ़ जाता है।
अगर पर्याप्त नींद लेने के बाद भी आपको लगातार थकान की समस्या हो सकती है। इसका कारण असंतुलित डाइट हो सकती है। अधिक प्रोटीन और कम कार्बोहाइड्रेटेड वाली डाइट लेने से शरीर की एनर्जी पर असर पड़ता है। वहीं लंबे समय तक डिहाइड्रेशन की वजह से भी थकान लग सकती है। लेकिन लगातार थकान के पीछे एनीमिया, थायराइड की समस्या, विटामिन की कमी या अन्य सेहत संबंधी कारण हो सकते हैं। इसलिए यह लक्षण लंबे समय तक बना रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि प्रोटीन की जरूरत हर व्यक्ति के शरीर के अलग-अलग होती है। यह उम्र, वजन, फिजिकल एक्टिविटी और सेहत पर निर्भर करती है। इसलिए जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं या फिर एथलीट हैं। उनको नॉर्मल लोगों की तुलना में अधिक प्रोटीन की जरूरत हो सकती है। वहीं किडनी से जुड़ी कुछ बीमारियों परेशान लोगों को डॉक्टर की सलाह के मुताबिक प्रोटीन की मात्रा का ध्यान रखना चाहिए। वहीं संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए।