By अंकित सिंह | Oct 22, 2026
इस महीने की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनावों के दौरान हुई राजनीतिक उठापटक की झलक विधान परिषद की 11 सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनावों में भी देखने को मिल सकती है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले, सत्ताधारी भाजपा और सपा के सामने एक बार फिर आंकड़ों, उम्मीदवारों के चयन और क्रॉस-वोटिंग की संभावना को लेकर परीक्षा की स्थिति होगी। भाजपा और समाजवादी पार्टी ने इसमें अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों के लिए ये प्रतिष्ठा का चुनाव बन चुका है।
लखनऊ स्नातक सीट पर भाजपा से अवनीश कुमार सिंह और सपा से कांति सिंह आमने-सामने हैं। वहीं, आगरा में बीजेपी से डॉ मानवेन्द्र प्रताप सिंह के सामने सपा के आकाश अग्रवाल हैं। मेरठ-सहारनपुर में बीजेपी के दिनेश गोयल और सपा के प्रमेंद्र भाटी चुनाव मैदान में हैं। इलाहाबाद-झांसी सीट पर बीजेपी के अशोक कुमार राठौर और सपा के डॉ मान सिंह यादव के बीच मुकाबला है। वहीं, वाराणसी-मिर्जापुर स्नातक सीट पर बीजेपी के केदारनाथ सिंह और सपा के आशुतोष सिन्हा में सीधा मुकाबला है।
शिक्षक MLC चुनाव में लखनऊ से बीजेपी के उमेश द्विवेदी के मुकाबले सपा के सुशील कुमार पटेल हैं। मेरठ-गाजियाबाद से बीजेपी के श्रीचंद शर्मा तो सपा के नितिन कुमार तोमर, बरेली-मुरादाबाद से डॉ हरिसिंह ढिल्लो बीजेपी से और हाजी मोहम्मद दानिश अख्तर सपा से हैं। वाराणसी में बीजेपी से डॉ प्रमोद मिश्रा और सपा से लाल बिहारी यादव आमने-सामने हैं। आगरा से बीजेपी के हरी किशोर तिवारी तो सपा से डॉ प्रकाश चंद गुप्ता और गोरखपुर-फैजाबाद से बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी तो सपा से बीजेपी के बागी उम्मीदवार डॉ संजयन त्रिपाठी मैदान में हैं।
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का एक विशेष स्थान है, जहाँ मतदाता आम जनता से नहीं, बल्कि पंजीकृत स्नातकों और शिक्षकों में से होते हैं। इन क्षेत्रों में अक्सर कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है, जहाँ उम्मीदवार अपनी संगठनात्मक ताकत, शिक्षण संस्थानों के भीतर अपने नेटवर्क, और पेशेवरों तथा राय बनाने वाले लोगों (ओपिनियन-मेकर्स) के बीच अपने प्रभाव पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं। इस 'मिनी-जनादेश' में 10 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। 'स्नातक' निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए, व्यक्ति के पास कम से कम तीन साल पहले प्राप्त की गई डिग्री होनी चाहिए। 'शिक्षक' निर्वाचन क्षेत्रों में, केवल वे शिक्षक ही मतदान कर सकते हैं जो वर्तमान में पढ़ा रहे हैं।
अगर आपका नाम संबंधित स्नातक या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में है, तो अपना बूथ और क्रम संख्या पहले चेक करें। पहचान-पत्र साथ रखें। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बुधवार को कहा कि 23 अक्टूबर को होने वाले उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनावों में, मतदाता सूची में नाम या अन्य विवरणों में मामूली लिपिकीय या छपाई संबंधी गलतियों के कारण पात्र मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा।
- 22 से 35 साल के मतदाता निर्णायक साबित हो सकते हैं: उम्मीदवारों ने युवाओं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, महिलाओं और शिक्षकों के बीच बड़े पैमाने पर पंजीकरण अभियान चलाए हैं। इनमें सबसे बड़ा समूह 22 से 35 साल के युवा मतदाताओं, यानी 'जेन जेड' (Gen Z) का है।
- युवा मतदाताओं को लुभाने के लिए पार्टियों में होड़: समाजवादी पार्टी (SP) बेरोजगारी, पुरानी पेंशन योजना (OPS) और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके युवाओं और कर्मचारियों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। वहीं, योगी सरकार अपनी उपलब्धियों और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के आधार पर वोट मांग रही है।
बीजेपी के लिए, ये एमएलसी चुनाव सिर्फ विधान परिषद के गणित (जहाँ उसे पहले से ही बहुमत हासिल है) तक सीमित नहीं हैं। बल्कि, ये चुनाव पार्टी की संगठनात्मक मशीनरी को परखने, स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के मूड को समझने, और 2027 की लड़ाई से पहले एक नैरेटिव (विमर्श) सेट करने का जरिया हैं। इस चुनाव में सत्ताधारी दल को कुछ बढ़त हासिल है, लेकिन अतीत में भी नतीजों ने चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। 2020 के MLC चुनावों में, वाराणसी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद, SP ने वाराणसी 'स्नातक' सीट जीत ली थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र की गोरखपुर-फैजाबाद 'शिक्षक' सीट पर BJP ने अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था। इस सीट पर 'शिक्षक' समूह के उम्मीदवार की जीत हुई थी। यही वजह है कि कोई भी दल किसी भी सीट को हल्के में नहीं ले रहा है।
यह चुनाव केवल 11 MLC चुनने का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को आकार देने में भी मदद करेगा। उनके अनुसार, अगर BJP अपनी सीटों की संख्या बढ़ाती है, तो इससे यह संदेश जाएगा कि राज्य के पढ़े-लिखे युवा और शिक्षक, योगी सरकार की नीतियों से संतुष्ट हैं। वहीं, अगर इन निर्वाचन क्षेत्रों में SP को बढ़त मिलती है, तो 2027 के चुनावों से ठीक पहले उसे एक मनोवैज्ञानिक लाभ मिलेगा। इन नतीजों से दोनों पार्टियों को अपनी कमियों को पहचानने और अगले दो महीनों में अपनी चुनावी रणनीतियों को बेहतर बनाने का मौका भी मिलेगा।