उत्तर प्रदेश ने साढ़े 4 साल में 'संस्कृत' के प्रचार-प्रसार में गढ़े कीर्तिमान

By प्रेस विज्ञप्ति | Sep 18, 2021

लखनऊ। राज्य सरकार ने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में यूपी में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के साथ संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने और बोलचाल की भाषा के रूप में विकसित करने के बड़े प्रयास किये हैं। विश्व की सबसे प्राचीन भाषा और समस्त भारतीय भाषाओं की जननी कही जाने वाली ‘संस्कृत’ को योगी सरकार में सम्मान मिला है। इससे पहले पूर्व की सरकारों ने कभी भी संस्कृत को आगे बढ़ाने के प्रयास नहीं किये। संस्कृत के नाम पर अकादमी और संस्थान तो चले लेकिन उनको आगे बढ़ाने के लिए कभी भी ठोस और प्रभावी योजनाएं नहीं बनी। जिसकी वजह से संस्कृत लोकप्रिय भाषा के रूप में स्थापित नहीं हो पाई। 

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संस्थान की मिस्डकॉल योजना के माध्यम से संस्कृत सम्भाषण योजना में रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। संस्थान ने योग, पौरोहित्य, ज्योतिष प्रशिक्षण शिविर योजना, प्रत्येक जनपद में वास्तु एवं ज्योतिष प्रशिक्षण शिविर, पुरस्कार योजना, व्याख्यान गोष्ठी योजना और एकमासात्मक नाट्य प्रशिक्षण योजना से संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। सिविल सेवा परीक्षा की निःशुल्क कोचिंग एवं मार्गदर्शन योजना, कम्प्यूटर के माध्यम से संस्कृत की कक्षाएं संचालित किये जाने की योजना के साथ उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान पुस्तकालय का सुदृढीकरण और छात्रवृत्ति योजना और पुस्तक के प्रकाशन का भी लाभ प्रदेश में संस्कृत भाषा सीखने वाले युवाओं को दिया जा रहा है।

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