UP विधान परिषद चुनाव: 40 साल बाद किसी पार्टी को मिला बहुमत, अब योगी सरकार के कामकाज पर अड़ंगा नहीं लगा पाएगा विपक्ष

By अजय कुमार | Apr 12, 2022

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 36 विधान परिषद की सीटों के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 33 सीटों पर जीत हासिल की है, वहीं समाजवादी पार्टी का इन चुनाव में खाता ही नहीं खुल पाया। इस प्रचंड जीत के साथ ही चार दशक बाद उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सत्ताधारी दल को प्रचंड बहुमत मिला है। स्थानीय निकाय प्राधिकारी क्षेत्रों से विधान परिषद की 36 सीटों के लिए हुए चुनाव में 9 पर भाजपा के प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। शेष 27 सीटों में से भी 24 सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। बाकी तीन में से दो पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं,जिसमें से एक बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी और दूसरी पर बीजेपी का बागी प्रत्याशी जीता है। एक सीट पर राजा भैया के जनसता दल को जीत हासिल हुई है। पिछले महीने विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत के बाद अब विधान परिषद में भी योगी सरकार को प्रचंड बहुमत मिलने से प्रदेश सरकार को अपने लोक कल्याण के कार्यक्रमों, महिलाओं की सुरक्षा एवं स्वावलम्बन, युवाओं के रोजगार, अन्नदाता किसानों एवं श्रमिकों के हित में और भी बेहतर काम करने में सुविधा रहेगी।विपक्ष इसमें किसी तरह का कोई अडंगा नहीं लगा पाएगी।

गौरतलब है कि इस विधान परिषद के स्थानीय निकाय चुनाव में मतदाता ग्राम प्रधान, प्रखंड विकास परिषदों और जिला पंचायतों के अध्यक्ष, शहरी क्षेत्रों के पार्षद, विधायक और सांसद होते हैं। 100 सदस्यीय विधान परिषद में अब बीजेपी के 66 विधायक हो गये हैं। करीब चार दशक बाद ऐसा होगा जब किसी पार्टी का विधानसभा से लेकर विधान परिषद तक प्रचंड बहुमत होगा। यूपी में बीजेपी के कई मुख्यमंत्री हुए, लेकिन ऐसा पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के दौरान हुआ है, जब बीजेपी को विधान परिषद में भी बहुमत हासिल हो गया है।

बहरहाल, भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सबसे बड़ा दल बनकर इतिहास रच दिया है। 36 सीटों पर हुए चुनाव से पूर्व तक विधान परिषद में भाजपा 35 सदस्यों के साथ परिषद में सबसे बड़ा दल था,लेकिन उसके पास बहुमत नहीं हासिल था,जो अब हासिल हो गया है। 36 विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई तो नौ सीटों पर भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध ही चुनाव जीत गये। बाकी बची 27 सीटों के लिए मतदान हुआ तो इसमें से भी तीन सीटों को छोड़कर बाकी 27 सीटें भाजपा के खाते में चली गईं। इस प्रकार भाजपा को 36 में से 33 सीट पर जीत हासिल हो गई।अब 100 सदस्य वाले उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भाजपा के 70 सदस्य है।

बताते चलें योगी आदित्यनाथ 2017 में जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, उस समय समाजवादी पार्टी विधान परिषद में सबसे बड़ा दल था। उसके बाद तो जैसे-जैसे चुनाव होते गए भाजपा आगे निकलती रही। कई बार विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के कारण तो कभी सपा के सदस्यों के इस्तीफा देने की वजह से विधान परिषद में सीटें खाली होती रहीं जिस पर भाजपा जीतती गई। प्रदेश में 1990 से पहले कांग्रेस विधानसभा के दोनों सदनों में सबसे बड़ी पार्टी हुआ करती थी। अब यह तमगा भाजपा के पास है।

विधान परिषद चुनाव की बात की जाए तो आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि स्थानीय निकाय प्राधिकार क्षेत्र के इस चुनाव में सत्ता पक्ष की ही जीत होती है। 2004 में मुलायम सिंह यादव जब मुख्यमंत्री थे तब समाजवादी पार्टी 36 में से 24 सीटों पर जीती थी। इसके बाद 2010 में मायावती के शासनकाल में बसपा ने 36 में से 34 सीटों पर कब्जा किया था। अखिलेश यादव के समय भी कुछ नहीं बदला था, 2016 में अखिलेश की समाजवादी पार्टी ने भी 36 में से 31 सीटें जीती थीं।

बताते चलें विधान परिषद में 38 सीटें निर्वाचन क्षेत्र की है, 36 सीटें स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र की जबकि 8 सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आती हैं। इतनी ही सीटें यानि आठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की और दस सीटों पर राज्यपाल मनोनीत करते हैं।

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