By दिव्यांशी भदौरिया | Apr 13, 2026
आज के डिजिटल दौर में UPI हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने भारत में 10 साल पूरे कर लिए है। जब एनपीसीआई ने 11 अप्रैल 2016 में इसे पेश किया था, तब किसी ने यह तक नहीं सोचा था कि एक दिन रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े शोरुम तक हर कोई 'स्कैन एंड पे'पर निर्भर हो जाएगा। आपको बता दें कि मार्च 2026 में यूपीआई ने 22.64 अरब ट्रांजेक्शन का आंकड़ा पार कर लिया है। जैसे ही इसका चलन काफी बढ़ा है वैसे ही इसके गलत ट्रांजैक्शन की घटनाएं भी काफी सामने आई है।
क्या वाकई वापस मिल सकते हैं पैसे?
इस बात को समझना बेहद जरुरी है कि यूपीआई में गलत ट्रांजेक्शन को रिवर्स करने का कोई बटन नहीं है। अगर एक बार पैसे कट गए तो आप उस ट्रांजेक्शन को कैंसिंल नहीं कर सकते हैं। एक बार ट्राजेक्शन सफल हो गया है, तो इसे बैंक अपने स्तर पर तब तक वापस नहीं ले सकता है।
जब तक कि पैसे पाने वाला व्यक्ति इसके लिए अपनी सहमति न दे दे। जैसा कि यूपीआई एक वन-टाइम विंडो है, जिसका मतलब है कि पैसा पलक झपकते ही एक खाते से दूसरे चला जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें। अपनी मेहनत की कमाई को वापस प्राप्त करने के लिए सिस्टम में कुछ सुरक्षा चक्र बने हुए हैं।
पैसे वापस पाने के लिए क्या करें?
यदि आपसे गलती से पैसे गलत जगह ट्रांजेक्शन हो गए हैं, तो आप सबसे पहले उस व्यक्ति से संपर्क करने की कोशिश करें जिसके पास पैसे गए हैं। वह व्यक्ति ईमानदार है और पैसे वापस करने के लिए तैयार है, तो आपकी समस्या तुरंत ही सॉल्व
हो जाएगी। अगर सामने वाला व्यक्ति सहयोग न कर, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें।
आप बैंक के एप या कस्टमर केयर पर रिपोर्ट इश्यू का ऑप्शन चूज करें। इसके बाद आपको एनपीसीआई (NPCI) के पोर्टल या भीम (BHIM) एप पर जाकर आधिकारिक तौर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। ध्यान रहे कि आपको ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट और ट्रांजैक्शन आईडी संभाल कर रखें, क्योंकि शिकायत के दौरान यह सबसे बड़ा प्रमाण है।
बैंक न सुनें, तो क्या करें
अक्सर होता है कि बैंक के शुरआती स्तर पर सुनवाई नहीं होती है। ऐसी स्थिति में आपको बैंक के शिकायत निवारण विभाग का दरवाजा खटखटाना जरुरी है। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारी आपकी समस्या को गंभीरता से सुनते हैं। यदि बैंक के आंतरिक सिस्टम से भी आपको 30 दिनों के भीतर कोई समाधान न मिले, तो आप सीधे तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लोकपाल से संपर्क करें।
इस बात का ध्यान रखें कि बैंक आपकी सिर्फ मदद कर सकता है। अगर पैसे पाने वाला व्यक्ति पैसे खर्च कर दिए या वापस करने से साफ मना कर दें, तो कानूनी प्रक्रिया लंबी और पेचीदा बन सकती है।
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है
गौरतलब है कि जल्दबाजी ही नकुसान का कारण बनती है। गलत ट्रांजैक्शन से बचने के लिए हमेशा मोबाइल नंबर टाइप करने के बजाय QR Code स्कैन करने को प्राथमिकता दें। यदि आप नंबर टाइप करके भुगतान कर रहे हैं, तो एक बार सामने वाले से नाम की पुष्टि दोबारा कर लें। अगर आप किसी को भारी रकम भेज रहे हैं, तो सबसे पहले आप उस व्यक्ति को 'टेस्ट ट्राजैक्शन' के तौर पर 1 रुपये भेजे सकते हैं, जब वह व्यक्ति कह दें कि उसको 1 रुपया मिल गया है, इसके बाद ही बाकी राशि का ट्रांसफर करें। इसके अलावा आप जब भी QR Code स्कैन करके पैसा का भुगतान कर रहे हैं, तो एक बार अमाउंट जरुर चेक करें इसके बाद ही भुगतान करें।