By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 09, 2026
नयी दिल्ली, आठ अगस्त भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन के लिए एक विधेयक के पारित होने के बाद ऐसे लेनदेन पर शुल्क लगाने के संबंध में आशंकाओं को दूर करने के लिए सरकार ने शनिवार को स्पष्ट रूप से कहा कि उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) सेवाएं निःशुल्क बनी रहेंगी। हालांकि, शुल्क लागू होने पर व्यापारियों को मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होगा। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, एमडीआर केवल एक निश्चित सीमा से ऊपर, एक सीमित संख्या में व्यापारी लेनदेन पर मामूली दर से लागू होंगे, जो डेबिट या क्रेडिट कार्ड के एमडीआर की तुलना में बहुत कम होगा।
इसमें कहा गया कि वास्तव में यह संशोधन यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता, तकनीकी उन्नति और उभरते जोखिमों के खिलाफ लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। बयान में कहा गया कि लेनदेन की अत्यधिक मात्रा के साथ प्रणाली को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण व निरंतर सुधार की आवश्यकता है। बयान में आगे कहा गया कि बाजार के विस्तार और स्थिरता के लिए ऐसा करना जरूरी था।
बयान में कहा गया कि यदि बाहरी दबाव एक कारक होता, तो सरकार 2016 में यूपीआई पेश नहीं करती या जनवरी 2020 से व्यापारियों और नागरिकों दोनों के लिए इसे मुफ्त नहीं बनाती और यह सुनिश्चित नहीं करती कि यह दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय की अंतर-संचालनीय भुगतान प्रणाली बने। इसलिए, इस संशोधन को सरकार के उस व्यापक उद्देश्य के संदर्भ में देखा जाना चाहिए जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत का डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचा टिकाऊ, प्रतिस्पर्धी, अभिनव और देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की सेवा करने में सक्षम बना रहे। बयान में कहा गया कि यूपीआई भारत का अपना नवाचार है, और सरकार आने वाले दशकों तक इसकी स्थिरता सुनिश्चित करते हुए इसे नागरिकों के लिए मुफ्त रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे केवल वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और एनपीसीआई की आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और असत्यापित संदेशों को आगे न भेजें।