By Ankit Jaiswal | Aug 26, 2026
अमेरिकी शेयर बाजार में बुधवार को निवेशकों ने कारोबार से थोड़ा दूरी बनाए रखी। बाजार की नजर एक तरफ जुलाई की महंगाई के आंकड़ों पर रही, वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एनवीडिया के तिमाही नतीजों का इंतजार भी बना रहा। इन दोनों घटनाक्रमों को लेकर निवेशकों में सतर्कता दिखाई दी है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ब्याज दरों से जुड़े बाजार अनुमान में सितंबर की बैठक में दर बढ़ने की संभावना आंकड़े जारी होने से पहले करीब 36 प्रतिशत थी, जो बढ़कर लगभग 44 प्रतिशत हो गई। इससे शेयर बाजार पर दबाव देखने को मिला। एलपीएल फाइनेंशियल के मुख्य शेयर रणनीतिकार जेफ बुचबाइंडर ने कहा कि महंगाई अभी भी पूरी तरह काबू में नहीं आई है और इसका असर ब्याज दरों पर पड़ रहा है।
बुधवार सुबह कारोबार में डाउ जोंस 21.54 अंक यानी 0.04 प्रतिशत गिरकर 53,555.86 पर था। एसएंडपी 500 में 2.24 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त रही और यह 7,679.52 पर पहुंचा। नैस्डैक में 13.85 अंक यानी 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 26,137.16 का स्तर दर्ज किया गया था।
एसएंडपी 500 में सूचना प्रौद्योगिकी और औद्योगिक कंपनियों के शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया। माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल के शेयर करीब 0.5 प्रतिशत चढ़े। वहीं, एनवीडिया के शेयर तिमाही नतीजों से पहले 0.4 प्रतिशत नीचे रहे। गौरतलब है कि एनवीडिया के नतीजों को एआई से जुड़े निवेश और कंपनियों की कमाई की वास्तविक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
अगर कंपनी के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहते हैं तो एआई को लेकर बाजार में चल रही तेजी की टिकाऊ क्षमता पर सवाल उठ सकते हैं। इसका असर तकनीकी कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर, मजबूत नतीजे से सेमीकंडक्टर कंपनियों को और समर्थन मिलने की संभावना है।
कुछ अन्य कंपनियों के शेयर भी चर्चा में रहे। मेटा के शेयर करीब 0.6 प्रतिशत नीचे आए। कंपनी ने बच्चों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से जुड़े मामले में अमेरिकी राज्यों के साथ समझौते के तहत अधिकतम 16.68 अरब डॉलर तक भुगतान करने और फेसबुक तथा इंस्टाग्राम में बड़े बदलाव करने पर सहमति जताई है। इंट्यूट के शेयर करीब चार प्रतिशत गिरे, जबकि जेएम स्मकर के शेयर चार प्रतिशत चढ़े।
बता दें कि आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श का जैक्सन होल सम्मेलन में शुक्रवार को होने वाला भाषण भी बाजार के लिए अहम माना जा रहा है। सितंबर का महीना ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी शेयर बाजार के लिए कमजोर माना जाता है। ऐसे में महंगाई, ब्याज दर, सरकारी कर्ज और तेल कीमतों से जुड़े संकेतों के बीच निवेशकों की नजर अब कंपनियों के नतीजों और केंद्रीय बैंक की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं।