Prabhasakshi Exclusive: US NSA Jake Sullivan सिर्फ Modi को जीत की बधाई देने आये थे या भारत-अमेरिका के बीच कुछ और ही खिचड़ी पक रही है?

By नीरज कुमार दुबे | Jun 21, 2024

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में हमने इस सप्ताह ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि अमेरिकी एनएसए जेक सुलिवन की भारत यात्रा के उद्देश्य क्या थे और यह कितनी सफल रही? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरा कार्यकाल शुरू करने के कुछ दिनों बाद, भारत और अमेरिका व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए। उन्होंने कहा कि सुलिवन ने यात्रा के दौरान मोदी, भारतीय विदेश मंत्री और अपने भारतीय समकक्ष से मुलाकात की और कहा की कि दोनों देश घनिष्ठ संबंधों को और आगे बढ़ाएंगे।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि सुलिवन की यात्रा का मुख्य फोकस रक्षा, सेमीकंडक्टर, 5जी वायरलेस नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अधिक निकटता से सहयोग करने के लिए पिछले साल जनवरी में दोनों देशों द्वारा शुरू की गई एक ऐतिहासिक पहल पर भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ चर्चा करना था। उन्होंने कहा कि देखा जाये तो चीन का मुकाबला करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मोदी के नए प्रशासन के शुरुआती दिनों में सुलिवन की यात्रा से संकेत मिलता है कि अमेरिका दोनों देशों के बीच उच्च प्रौद्योगिकी साझेदारी में गति बनाए रखना चाहता है।

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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि डोभाल के साथ सुलिवन की बैठक के बाद दोनों देशों द्वारा एक संयुक्त पत्र में कहा गया कि उन्होंने सटीक-निर्देशित गोला-बारूद और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा-केंद्रित इलेक्ट्रॉनिक्स प्लेटफार्मों के लिए अमेरिकी और भारतीय कंपनियों के बीच एक नई रणनीतिक साझेदारी शुरू की। बयान के अनुसार, दोनों देश "महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के लिए" दक्षिण अमेरिका में लिथियम संसाधन परियोजना और अफ्रीका में दुर्लभ पृथ्वी भंडार में सह-निवेश करने पर भी सहमत हुए और भूमि युद्ध प्रणालियों के संभावित सह-उत्पादन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ाना मोदी प्रशासन का शीर्ष फोकस बना हुआ है क्योंकि वह आयातित हथियारों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। हालाँकि भारत ने अपने सैन्य उपकरणों के आयात में विविधता ला दी है, फिर भी यह अभी भी रूस पर बहुत अधिक निर्भर है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए, प्रौद्योगिकी पहल सर्वोच्च प्राथमिकता है क्योंकि इसका उद्देश्य देश की सुरक्षा को मजबूत करना और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का निर्माण करना है।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत अत्याधुनिक तकनीकों के मामले में अग्रणी देशों में से एक बनना चाहता है और इन क्षेत्रों में अग्रणी अमेरिका के साथ साझेदारी करना नई दिल्ली के लिए बहुत फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि आक्रामक चीन को लेकर दोनों देशों में आपसी चिंताओं के बीच हाल के वर्षों में वाशिंगटन के साथ नई दिल्ली के संबंधों में विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि जहां तक अमेरिका में एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या की कथित साजिश का मामला है तो इससे संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इन मामलों पर काफी व्यावहारिक है। वे लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भारत के साथ संबंध महत्वपूर्ण हैं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि यह कथित साजिश संबंधों को पटरी से उतार देगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारतीय उद्योग के लिए द्विदलीय समर्थन मौजूद है और पारिस्थितिकी तंत्र और आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण उत्पादन की कुंजी है।

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