दोस्ती रखोगे तो...भारत-ईरान को साथ देख बौखला उठा अमेरिका, दे डाली धमकी

By अभिनय आकाश | Sep 03, 2026

किर्गिस्तान में पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजिशियान की मुलाकात के बाद अब अमेरिका की ओर से भी एक बड़ा बयान सामने आया है और यह बयान कुछ ऐसा है कि ईरान से अगर दोस्ती रखोगे तो अमेरिका से दुश्मनी मोल लेनी पड़ेगी क्योंकि एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही तो दूसरी तरफ किरगिस्तान में पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिशियान की मुलाकात हुई और इस मुलाकात के बाद अमेरिका ने दुनिया के उन तमाम देशों को चेतावनी दे दी जो ईरान के साथ कारोबार बढ़ाने की तैयारी में हैं। मामला तब और दिलचस्प हो गया जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से सीधे पीएम मोदी और पेजिशियान की मुलाकात को लेकर सवाल पूछ लिया गया। सवाल था कि भारत के प्रधानमंत्री ने ईरानी राष्ट्रपति और वहां के अधिकारियों से मुलाकात की। ऐसा लग रहा है कि दोनों देश किसी तरह के व्यापार समझौते की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में अमेरिका का उन देशों के लिए क्या संदेश है जो ईरान के साथ कारोबार कर रहे हैं या करना चाहते हैं।

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वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिश्कियान ने  युद्ध के दौरान भारत के समर्थन और सहयोग की सराहना की। उन्होंने क्षेत्र में शांति कायम करने के लिए भारत से अपनी कूटनीतिक ताकत और प्रभाव का इस्तेमाल करने की अपील की। ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक विदेशकियान ने कहा कि ईरान की सरकार शुरू से ही शांति और सुरक्षा कायम करने और बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करती रही है। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ने के बजाय उसने युद्ध और असुरक्षा का रास्ता चुना। अब जरा इस मुलाकात के बड़े मायने समझिए। भारत और ईरान के रिश्ते सिर्फ राजनीतिक नहीं दोनों देशों के बीच कारोबार, ऊर्जा कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई मुद्दे हैं। भारत के लिए ईरान खासतौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चाबहार पोर्ट के जरिए भारत मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच बनाने की कोशिश करता रहा। 

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ऐसे समय में जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। पीएम मोदी का ईरानी राष्ट्रपति से मिलना भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है। भारत अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रिश्ते आगे बढ़ा रहा है और दूसरी तरफ ईरान के साथ अपने पुराने और रणनीतिक संबंधों को बनाए हुए हैं और यही वजह है कि रूबियों की चेतावनी को हल्के में नहीं देखा जा रहा। हालांकि उन्होंने भारत पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाया और ना ही उन्होंने कहा कि मोदी विदेशकियान की बैठक में कोई प्रतिबंधित समझौता हुआ। लेकिन जिस तरह उन्होंने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंधों की बात कही उससे साफ है कि अमेरिका इस पूरे मामले पर करीबी नजर रख रहा है। 

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