Kuwait और Bahrain में ईरानी हमले के बाद अमेरिका ने किया पलटवार, युद्ध की आग में झुलस रहा West Asia, शांति वार्ता पर भी संकट

By नीरज कुमार दुबे | Jun 03, 2026

पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार तड़के ईरान ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि कुछ अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही टूटकर गिर गईं। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप स्थित एक सैन्य ठिकाने पर हमला किया।

देखा जाये तो इस ताजा सैन्य टकराव ने उस संघर्ष को और गंभीर बना दिया है जो इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने के बाद से लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है और इससे पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंका गहरा गई है। कई दौर की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद अब तक तनाव कम करने में कोई ठोस सफलता नहीं मिली है।

इसी बीच ईरान की अर्ध सरकारी समाचार एजेंसियों ने दावा किया कि तेहरान ने संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने को लेकर मध्यस्थ देशों से बातचीत रोक दी है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि वार्ता अभी भी जारी है। ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और इस्राइल के बीच लेबनान सीमा पर बढ़ते तनाव ने भी हालात को और संवेदनशील बना दिया है।

मध्यस्थता से जुड़े एक क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान में संघर्ष विराम लागू होने के बाद ही आगे की वार्ता संभव होगी। दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने से पहले सख्त शर्तें लागू करना चाहता है।

तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान की ओर जा रहे एक तेल टैंकर को भी रोक दिया। बोत्सवाना के ध्वज वाले इस जहाज ने कथित रूप से चौबीस घंटे तक अमेरिकी चेतावनियों की अनदेखी की। इसके बाद अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन कक्ष पर हेलफायर मिसाइल दाग दी, जिससे वह निष्क्रिय हो गया। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार यह सातवां जहाज था जिसे अमेरिकी नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश में रोका गया।

अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज ईरान के खार्ग द्वीप की ओर जा रहा था, जहां से ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल रहा है। अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों और तटों तक पहुंचने वाले जहाजों पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी थी। इसके जवाब में ईरान ने फारस खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण बनाकर शुल्क वसूली को औपचारिक रूप दिया। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसके और ओमान के क्षेत्रीय जल से होकर गुजरता है, इसलिए वहां उसकी संप्रभुता मान्य होनी चाहिए।

उधर, संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कुवैत ने ईरानी हमले के बाद अपने हवाई अड्डे पर उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया। वहीं जापान ने ऊर्जा कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी से नागरिकों को राहत देने के लिए उन्नीस अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट को मंजूरी दी है। जापानी सरकार ने माना कि पश्चिम एशिया की अनिश्चित स्थिति के कारण पेट्रोल, गैस और बिजली की कीमतों पर भारी दबाव बन रहा है।

वहीं ईरान के भीतर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। मई में वहां महंगाई दर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के कारण ईरान की तेल आधारित अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। बढ़ती महंगाई और मुद्रा के अवमूल्यन से आम जनता परेशान है। पिछले वर्षों में खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में वृद्धि को लेकर हुए प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। इस वर्ष भी मुद्रा संकट के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिन्हें इस्लामी गणराज्य के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में माना जा रहा है।

बहरहाल, विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं हुआ तो आर्थिक और सामाजिक अस्थिरता ईरान में एक बार फिर व्यापक जनआंदोलन को जन्म दे सकती है। ऐसे समय में पश्चिम एशिया का यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

प्रमुख खबरें

Fashion Trend में हैं ये Oxidized झुमके, घुंघरू डिजाइन से मिलेगा सबसे हटकर Ethnic Look

Hair Care: गर्मी में चिपचिपाहट से बाल हो रहे खराब? ये हल्के तेल लौटाएंगे खोई हुई चमक

ममता बनर्जी का बड़ा फैसला: Bengal TMC में विद्रोह के बाद सभी संगठन भंग

Shaurya Path: आकाश पर राज करेगी Indian Air Force, South Asia में ताकत के सारे समीकरण बदलकर रख देंगे 114 Rafale Jets