By रेनू तिवारी | Oct 05, 2026
ब्रिटेन स्थित RAF फेयरफोर्ड (RAF Fairford) सैन्य ठिकाने पर नए सुरक्षा खतरे की आशंका के बीच अमेरिका ने अपने सभी लंबी दूरी के B-1 बॉम्बर विमानों को वापस बुला लिया है। इन सभी रणनीतिक बॉम्बर विमानों को अमेरिका में उनके होम बेस पर सुरक्षित भेज दिया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियां इस एयरबेस को निशाना बनाने की कथित ईरानी साजिश की गहन जांच कर रही हैं। जिसमें इस सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने की बात कही गई थी, जहां अमेरिकी विमान तैनात थे।
अमेरिका ने इस नए खतरे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है और न ही यह बताया है कि क्या इसका संबंध ब्रिटेन में जांच की जा रही कथित ईरानी साजिश से है। CNN के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने इस घटनाक्रम को "वास्तविक घटना" बताया है।
यह कदम क्यों चर्चा में है?
बॉम्बर विमानों को वापस अमेरिका भेजने के फैसले ने सबका ध्यान खींचा है क्योंकि CNN के सूत्र के अनुसार, अमेरिकी सेना के लिए ऐसे विमानों को क्षेत्र के किसी अन्य बेस पर भेजने के बजाय सीधे होम बेस पर वापस बुलाना असामान्य था। इसलिए, यह वापसी RAF फेयरफोर्ड के आसपास सुरक्षा की कड़ी जांच और ब्रिटेन में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के लिए खतरे के माहौल के बीच हुई है।
RAF फेयरफोर्ड अमेरिकी ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के लिए एक ऑपरेशनल लोकेशन रहा है और इसका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में शामिल अमेरिकी B-1 बॉम्बर विमानों की तैनाती के लिए किया गया है। नतीजतन, यह वापसी ब्रिटिश बेस से अमेरिकी लंबी दूरी के स्ट्राइक विमानों की तैनाती में एक अहम बदलाव को दर्शाती है।
कथित साजिश के सिलसिले में पांच लोग गिरफ्तार
यह ताजा घटनाक्रम पिछले महीने ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा RAF फेयरफोर्ड को निशाना बनाने की कथित ईरानी साजिश के सिलसिले में की गई गिरफ्तारियों के बाद सामने आया है। पुलिस ने 27 सितंबर को एयरबेस के पास आतंकवाद और विस्फोटक से जुड़े अपराधों के संदेह में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। संदिग्ध ब्रिटिश नागरिक थे, जिनकी उम्र 23 से 25 साल के बीच थी और वे लंदन इलाके के रहने वाले थे। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान तीन वैन की तलाशी ली गई, जिनमें कोई विस्फोटक नहीं मिला।
ट्रंप ने संदिग्धों की रिहाई की आलोचना की
पांच लोगों की ज़मानत पर रिहाई की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आलोचना की। इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, "मैं ऐसा नहीं करता।" इसके बाद, ब्रिटिश अधिकारियों ने गुरुवार (1 अक्टूबर) को कथित साज़िश के सिलसिले में एक और संदिग्ध को गिरफ़्तार किया, जो 25 साल का ब्रिटिश-ईरानी दोहरी नागरिकता वाला व्यक्ति है। इन गिरफ़्तारियों और उसके बाद हुई जांच के कारण RAF फेयरफ़ोर्ड के आस-पास सुरक्षा स्थिति पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।
ईरान ने शामिल होने से इनकार किया
इस बीच, ईरान ने आरोपों को खारिज कर दिया है और कथित साज़िश में किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया है। तेहरान ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और आरोपों के बाद तेहरान में ब्रिटिश राजदूत को तलब किया।
अमेरिकी बॉम्बर विमानों की यह ताज़ा गतिविधि इसी पृष्ठभूमि में हो रही है, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने नई रिपोर्ट की गई धमकी और कथित ईरानी साज़िश के बीच कोई सीधा संबंध सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है। उस धमकी की खास प्रकृति का भी खुलासा नहीं किया गया है जिसके कारण विमानों को अमेरिका वापस लौटना पड़ा।
RAF फेयरफ़ोर्ड क्या है?
RAF फेयरफ़ोर्ड एक ब्रिटिश सैन्य एयरबेस है जिसका इस्तेमाल अमेरिका लंबी दूरी के बॉम्बर विमानों की तैनाती के लिए एक ऑपरेटिंग लोकेशन के तौर पर करता रहा है। US ग्लोबल स्ट्राइक कमांड को सहयोग देने में इसकी भूमिका ने इसे यूरोप में अमेरिकी रणनीतिक एविएशन ऑपरेशन्स के लिए एक महत्वपूर्ण जगह बना दिया है। इसलिए, सभी बॉम्बर विमानों का अपने अमेरिकी होम स्टेशनों पर लौटना हालिया तैनाती के पैटर्न में एक उल्लेखनीय बदलाव है, जबकि ब्रिटिश अधिकारी अभी भी इस सुविधा के ख़िलाफ़ कथित धमकी की जांच कर रहे हैं।
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