By अनन्या मिश्रा | Jul 14, 2025
अ, उ और म यह तीन अक्षर सत, चित और आनंद है। साथ ही यह ब्रह्मांड की सबसे पहली ध्वनि और सृष्टि के उद्भव का प्रतीक होता है। इसका जाप करने से निगेटिव एनर्जी दूर होती है और हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध व सिख धर्म में भी इसके महत्व को स्वीकार किया गया है।
शांत वातावरण में ध्यान मुद्रा में बैठकर 'ऊँ' का जाप करना सही माना जाता है। इससे मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति का ध्यान भी केंद्रित होता है। इस दौरान गहरी सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए ओ से ऊ तक जोर लगाएं। फिर म का उच्चारण करने में ध्वनि धीमी और शांत होती जाएगी।
सांसों और आवाज का उतार-चढ़ाव ही मन, आत्मा और बुद्धि को शांति देता है। वेदों की ऋचाएं और श्रुतियां भी इसके बिना अधूरी मानी जाती हैं। किसी भी मंत्र से पहले 'ऊँ' लगा देने से उसके फलित होने की शक्ति कई गुना तक बढ़ जाती है।
बता दें कि 'ऊँ' का उच्चारण करने के लिए सही समय ब्रह्म मुहूर्त होता है। इस समय ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ आप जल्दी जुड़ जाते हैं, लेकिन अगर आप ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो सूर्योदय से पहले उठकर इसका उच्चारण करें। आप इसको दिन के किसी भी समय कर सकते हैं।
हालांकि दिन निकलने के साथ शोरगुल और मन में कई तरह की चिंताएं और तनाव हो सकता है। ऐसे में आप इस दौरान गहरे ध्यान में नहीं उतर सकें। रात में शांति होने के बाद भी आप 'ऊँ' का उच्चारण कर सकते हैं।