By नीरज कुमार दुबे | Aug 03, 2026
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मॉनसून सत्र की आज हुई शुरुआत के दौरान अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सभी दलों के जो तेवर दिखे और एक दूसरे को घेरने की जो तैयारियां देखने को मिलीं उसके चलते यह सत्र हंगामेदार रहने की संभावना है। सत्र की शुरुआत वाले दिन ही जिस तरह विपक्षी विधायकों ने सरकार को घेरा और पलटवार में मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष पर जो करारा निशाना साधा उससे स्पष्ट हो गया कि सभी नेता अपने अपने चुनावी तरकश में जबरदस्त वार वाले राजनीतिक तीर लेकर आये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार और डबल इंजन सरकार सदन के समय का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों के आधार पर योजनाएं बनाकर प्रदेश में व्यापक सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की छवि बदलने में सरकार सफल रही है और राज्य को ‘बीमारू’ की स्थिति से निकालकर राजस्व अधिशेष (रेवेन्यू सरप्लस) राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आर्थिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सदन में सरकार की युवा कल्याण योजनाओं, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों के जीवन में आए बदलाव तथा गरीबों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा परिवर्तन का केंद्र है, जहां नीतियां बनाई जाती हैं और जनहित के विषयों पर विचार-विमर्श होता है। मुख्यमंत्री ने सावन माह की महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय किसानों, प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े विद्यार्थियों तथा कांवड़ यात्रा के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इन सभी वर्गों को शुभकामनाएं भी दीं।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रही समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग आज राम मंदिर के चंदे में चोरी की बात कर रहे हैं, उन्होंने मंदिर निर्माण में अपनी ओर से एक पैसा भी योगदान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यही वे लोग हैं जिन्होंने अयोध्या में रामभक्तों पर गोली चलवाई थी और अदालतों में वकीलों की फौज खड़ी कर श्रीराम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में बाधाएं उत्पन्न करने का प्रयास किया था।
मुख्यमंत्री ने किसानों के मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी को घेरते हुए कहा कि उनके शासनकाल में किसानों के हितों की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिला, गन्ना किसानों का भुगतान दस-दस वर्षों तक लंबित रहा और अनेक किसानों को आत्महत्या तथा पलायन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि किसानों की सुरक्षा और सुविधाओं पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को व्यापक लाभ पहुंचाया गया है।
उधर, विधानसभा के बाहर समाजवादी पार्टी के विधायकों ने राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। इसके साथ ही विपक्ष ने नीट-यूजी परीक्षा पत्र लीक, प्रदेश में बिजली आपूर्ति की समस्या तथा उर्वरकों की कमी जैसे मुद्दों को भी उठाया। माना जा रहा है कि राम मंदिर दान विवाद समेत ये सभी विषय विधानसभा के भीतर भी जोरदार तरीके से उठाए जाएंगे।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के अनुसार, मानसून सत्र के दौरान राज्य सरकार अनुपूरक बजट भी पेश करेगी। इस बजट के माध्यम से वार्षिक बजट पारित होने के बाद सामने आए नए व्यय मदों तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया जाएगा। चार दिन तक चलने वाला यह मानसून सत्र 6 अगस्त को संपन्न होगा। ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच जनहित के मुद्दों के साथ-साथ राम मंदिर दान विवाद, किसानों, शिक्षा, बिजली और अन्य समसामयिक विषयों पर तीखी बहस होने के आसार हैं।