CAA लागू करने वाला पहला राज्य बना यूपी, 32,000 शरणार्थी कर चुके हैं आवेदन

By अजय कुमार | Jan 14, 2020

उत्तर प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बना गया है जहां नागरिकता संशोधन बिल लागू कर दिया गया है। 10 जनवरी को सीएए लागू होते ही करीब पचास हजार हिंदू शरणार्थी ने नागरिकता पाने के लिए आवदेन भी कर चुके है। इसमें से करीब 15 हजार शरणार्थी पीलीभीत जिलें के है। लखनऊ से भी काफी आवदेन आये है। ये संख्या आने वाले दिनों मंे करीब दो लाख तक पहुंच सकती है। आवदेन करने वाले पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आये लोग हैं, जिन्हें इन देश में अल्पसंख्यक होने के कारण उत्पीड़न का शिकार होने पड़ा था।प्रदेश सरकार ने पहले चरण में इन शरणर्थियों को नागरिकता देने के लिए सूची केंद्र सरकार को भेज दी है। यूपी सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया, तीन देशों से आए हिंदू बौद्ध, ईसाई और पारसी प्रदेश में रहे रहे हैं। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) की अधिसूचना जारी हो चुकी है और सीएए के दायरे में आने वाले शरणर्थियों को नागरिकता दी जानी है। जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर पहले चरण में 21 जिलों में 32 हजार से ज्यादा शरणार्थी चिन्हित किए शर्मा ने कहा कि सभी जिलाधिकारियों को शरणार्थी का पता लगाने का निर्देश दिया गया है। अन्य जिलों में भी आंकडे़ एकत्रित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी यह संख्या और भी बढ़ेगी।

इसे भी पढ़ें: नागरिकता कानून का अंध-विरोध कर रहे लोगों की आंखें अब भी क्यों नहीं खुल रहीं

इसी तरह से 18 जनवरी को काशी, 19 जनवरी को गोरखपुर, 20 जनवरी को लखनऊ, 21 जनवरी को कानपुर, 22 जनवरी को मेरठ और 23 को आगरा के आयाजित कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन के बीच यूपी के कई इलाकों में हिंसा भी देखने को मिली थी। यूपी में तो अब माहौल शांत हो गया है लेकिन दिल्ली सहित कई राज्यों में अभी भी सीएए के विरोध में लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मुद्दे पर कानून पारित होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में भारी विरोध प्रदर्शन की आग को ठंडा करने के लिए गत दिनों अमित शाह ने इस अभियान के तहत दिल्ली के लाजपत नगर में घर-घर जाकर लोगों से सीएए कानून के फायदों को लेकर चर्चा की थी। उन्होंने इस विषय पर साहित्य एवं लिखित सामग्री भी वितरित की थी। इस अभियान के तहत राजनाथ सिंह, जे पी नड्डा, नितिन गडकरी सहित पार्टी के नेता देश के अन्य हिस्सों में अभियान में हिस्सा ले रहे हैं। भाजपा ने अपने दिग्गज नेताओं सहित सांसदों-विधायकों के माध्यम से भी सीएए के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये घर-घर अभियान शुरू कर रखा है। 

इसे भी पढ़ें: पुलिस में बड़े बदलाव की तैयारी में हैं योगी, कई शहरों में शुरू होगी कमिश्नर प्रणाली

बात सीएए के प्रमुख बिन्दुओं की कि जाए तो इस कानून में देश के किसी नागरिक की नागरिकता नहीं छीनेगी, बल्कि यह कानून नागरिकता देने का है। पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को आसानी से भारत की नागरिकता मिलेगी। नागरिकता हासिल करने के लिए उन्हें यहां कम से कम 6 साल बिताने होंगे. पहले नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम 11 साल बिताने का पैमाना तय था।

पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और आस-पास के देशों के हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के वो लोग जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया था. वे सभी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। ओसीआई कार्ड धारक यदि नियमों का उल्लंघन करते हैं तो केंद्र के पास उनका कार्ड रद्द करने का अधिकार होगा। ओसीआई कार्ड स्थायी रूप से विदेश में बसे भारतीयों को दिए जाने वाला कार्ड है।

- अजय कुमार

प्रमुख खबरें

CBSE का New Circular जारी: 2026 से Class 9 के Students के लिए 3 भाषाएं होंगी अनिवार्य

VD Satheesan के CM बनने से कांग्रेस में दरार? वेणुगोपाल बोले- High Command के फैसले पर सब एकजुट

CSK की हार के बीच चमके Kartik Sharma, दिग्गज Kris Srikkanth बोले- इस पारी से बहुत प्रभावित हुआ

NEET Paper Leak: PM Modi की चुप्पी पर भड़के Rahul Gandhi, Education Minister को बर्खास्त करने की मांग की