उत्तराखंड : सुरंग में फंसे श्रमिकों के सकुशल होने का पहला वीडियो जारी, मोदी ने धामी से बात की

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 21, 2023

पिछले नौ दिन से सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों तक छह इंच की पाइपलाइन के जरिए खिचड़ी भेजने के कुछ घंटों बाद बचावकर्मियों ने मंगलवार को तड़के उन तक एक कैमरा भेजा और उनके सकुशल होने का पहला वीडियो जारी किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पुन: फोन कर निर्माणाधीन सुरंग में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे बचाव एवं राहत कार्यों की जानकारी ली। इस बीच, अमेरिकी ऑगर मशीन के जरिए बड़े व्यास के माइल्ड स्टील पाइप डालकर एस्केप पैसेज बनाने का काम तीन दिन बाद फिर शुरू हो गया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सोमवार देर शाम दिल्ली से एंडोस्कोपिक फ्लैक्सी कैमरा आने के बाद इसे सुरंग के अंदर भेजा गया।

इससे पहले, चार इंच की पाइपलाइन के जरिए श्रमिकों तक भोजन, पानी, दवाइयां और आक्सीजन भेजी जा रही थी। श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों के तहत भारतीय वायुसेना ने एक सी-17 और दो सी-130जे सुपर हरक्यूलिस परिवहन विमान से 36 टन वजनी मशीनें पहुंचा दी हैं। मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को छह इंच व्यास की पाइपलाइन के सफलतापूर्वक मलबे के आरपार डाले जाने एवं इसके माध्यम से भोजन एवं अन्य आवश्यक सामान श्रमिकों तक पहुंचाने के बारे में अवगत कराया। धामी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री जी को श्रमिक बंधुओं से एंडोस्कोपिक फलैक्सी कैमरे की मदद से हुई बातचीत एवं उनकी कुशलता की भी जानकारी दी।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि सभी श्रमिक भाइयों को सुरक्षित निकालना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बारह नवंबर को दीवाली वाले दिन यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रही सुरंग के एक हिस्से के ढहने से उसमें श्रमिकों के फंसने के बाद से प्रधानमंत्री ने चौथी बार मुख्यमंत्री से बात की है। इस बीच, सूत्रों ने बताया कि सिलक्यारा सुरंग की ओर से एस्केप पैसेज बनाने के लिए अमेरिकी ऑगर मशीन से ड्रिलिंग फिर शुरू कर दी गयी है। शुक्रवार को दोपहर में ड्रिलिंग के दौरान किसी कठोर सतह से टकराने के बाद जबरदस्त आवाज आने के बाद कार्य रोक दिया गया था। इसमें मशीन को भी नुकसान पहुंचा था। दिल्ली से आई अभियांत्रिकी टीम ने इस मशीन के कलपुर्जे बदले जिसके बाद इससे काम शुरू हो गया। काम रूकने से पहले यह मशीन मलबे में ड्रिलिंग कर 22 मीटर पाइप डाल चुकी थी।

सूत्रों ने बताया कि मशीन से हो रहे कंपन को रोकने के लिए अब 900 मिमी व्यास के स्थान पर 800 मिमी व्यास के पाइपों का उपयोग किया जा रहा है। श्रमिकों से उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछने वाले चिकित्सक प्रेम पोखरियाल ने बचावकर्मियों को सलाह दी है कि मंगलवार को उन्हें भोजन में मूंग दाल की खिचड़ी भेजी जाए जिसमें सोया बड़ी और मटर शामिल हों। इसके अलावा उन्होंने केला भेजने की भी सलाह दी है।

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