By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 17, 2026
उत्तराखंड सरकार ने 1,320 मेगावाट की तापीय बिजली परियोजना को लेकर उठे सवालों पर बृहस्पतिवार को स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि टीएचडीसी इंडिया के एनटीपीसी की सहायक कंपनी होने के कारण इस परियोजना को राज्य सरकार के उपक्रम यूजेवीएनएल और टीएचडीसी इंडिया के संयुक्त उपक्रम के बजाय शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धी निविदा के जरिए अदाणी पावर को दिया गया। उत्तराखंड के प्रमुख सचिव (ऊर्जा) डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने यहां जारी बयान में कहा कि एनटीपीसी की ओर से टीएचडीसी को तापीय बिजली उत्पादन की अनुमति नहीं होने के कारण संयुक्त उपक्रम के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। इसके बाद प्रतिस्पर्धी निविदा के जरिए निजी कंपनी को परियोजना देने की प्रक्रिया अपनाई गई।
यह विकल्प इसलिए रखा गया था ताकि कंपनियां ईंधन की उपलब्धता, परिवहन लागत और अन्य व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्पर्धी दर की पेशकश कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी निविदा में पांच बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया था और बाद में मूल्य बोली में तीन कंपनियां शामिल हुईं। सुंदरम ने कहा, ‘‘इनमें जो न्यूनतम निविदा थी, उसी को हमने (परियोजना) आवंटित की है।
इसे लेकर बाकी किसी फर्म ने कोई आपत्ति भी नहीं की थी।’’ प्रमुख सचिव ने कहा कि निविदा प्रक्रिया में सभी नियमों, प्रतिस्पर्धा और नियामकीय मंजूरियों का पालन किया गया तथा इसमें किसी एक कंपनी को फायदा पहुंचाने का कोई सवाल नहीं उठता है।