By रेनू तिवारी | Jul 20, 2026
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित ऐतिहासिक लिपुलेख दर्रे से होने वाला भारत-तिब्बत सीमा व्यापार कई हफ्तों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार 1 अगस्त से दोबारा शुरू होने जा रहा है। चीनी अधिकारियों से मंजूरी मिलने के बाद तिब्बत के पुरांग (तकलाकोट) स्थित व्यापारिक मंडी में भारतीय व्यापारियों के प्रवेश का रास्ता साफ हो गया है। धारचूला के उपजिलाधिकारी (SDM) एवं व्यापार अधिकारी आशीष जोशी ने सोमवार को इस आधिकारिक पुष्टि की जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, तिब्बत के पुरांग (तकलाकोट) स्थित व्यापारिक मंडी में भारतीय व्यापारियों को प्रवेश की अनुमति मिल गई है। धारचूला के उपजिलाधिकारी एवं व्यापार अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि तिब्बती प्रशासन से आधिकारिक सूचना प्राप्त हुई है।
जोशी ने बताया कि तिब्बती प्रशासन द्वारा मांगी गई व्यापारिक वस्तुओं की सूची भेजी जा रही है ताकि सीमा व्यापार बिना किसी व्यवधान के सुचारु रूप से शुरू हो सके। व्यापारियों ने व्यापार सत्र देर से शुरू होने पर हालांकि नाराजगी जताई। भारत-चीन सीमा व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंगकली ने कहा कि जुलाई का पूरा महीना निकल जाने से व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। सीमा व्यापार केवल अक्टूबर तक चलता है और अगस्त के बाद तिब्बती खरीदारों की रुचि काफी कम हो जाती है। रोंगकली ने कहा, ‘‘ जुलाई का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी महीना हम खो चुके हैं। अब आशंका है कि व्यापार सत्र समाप्त होने तक लगभग 40 प्रतिशत सामान बिना बिके ही रह जाएगा।’’
उन्होंने बताया कि व्यापारी इस वर्ष नया माल बेचने के साथ-साथ वर्ष 2019 से तिब्बत के गोदामों में पड़ा पुराना ‘स्टॉक’ भी निकालना चाहते थे। इस वर्ष धारचूला व्यापार कार्यालय ने 113 व्यापारियों तथा इतने ही उनके सहायकों को सीमा व्यापार के लिए ‘पास’ जारी किए हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 2019 में बंद हुआ भारत-तिब्बत सीमा व्यापार इस साल लिपुलेख दर्रे से फिर से शुरू हो रहा है।
वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद सदियों पुराना सीमा व्यापार बंद हो गया था, लेकिन 1992 से दोनों देशों ने सीमा पर व्यापार को बहाल किए जाने की अनुमति दे दी। यह सीमा व्यापार वस्तु विनिमय व्यापार है जहां भारतीय व्यापारी चीनी-मिश्री, गुड़, कॉस्मेटिक और किराने का कुछ खास सामान लेकर तिब्बत जाते हैं और वहां से ऊन, पश्मीना जैकेट और जूते लाते हैं।