By एकता | Aug 24, 2026
उत्तराखंड सरकार युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में कई बड़े कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में पहला युवा आयोग (Yuva Aayog) बनाने की घोषणा की है। इसके साथ ही युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग, रोजगार के अवसर और अपना कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक मदद देने की योजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं।
उत्तराखंड में पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की परिस्थितियां अलग हैं। दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले छात्रों को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कई बार दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। वहीं, युवा उद्यमियों के सामने आर्थिक मदद, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां होती हैं।
ऐसे में युवा आयोग युवाओं की अलग-अलग जरूरतों को एक मंच पर लाने और उनकी आवाज को नीति निर्माण तक पहुंचाने में मदद कर सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी आयोग के पूरे ढांचे और इसके गठन की समयसीमा की जानकारी नहीं दी है।
सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना-2026 प्रस्तावित की है। इसके तहत छात्रों को घर बैठे मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की योजना है।
इस योजना में सिविल सेवा, डिफेंस सर्विसेज, बैंकिंग, रेलवे और SSC जैसी परीक्षाओं की तैयारी शामिल होगी। इसके अलावा CAT, MAT, GATE, NET और CSIR-NET जैसी प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं के लिए भी कोचिंग उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।
सरकार ने इसके लिए 27 करोड़ रुपये का बजट रखा है। योजना के तहत कक्षा 11वीं और 12वीं के करीब 10 हजार छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग देने की तैयारी है।
इसका सबसे बड़ा फायदा पहाड़ी जिलों के उन छात्रों को मिल सकता है, जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता है या महंगी निजी कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है।
सरकार रोजगार के साथ-साथ युवाओं को स्वरोजगार के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। युवा स्वरोजगार योजना के तहत 18 से 30 वर्ष की उम्र के युवा उद्यमियों को IIT और IIM आधारित कौशल प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही कारोबार शुरू करने के लिए लिए गए बैंक लोन पर 30 प्रतिशत तक की सब्सिडी देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे ऐसे युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद मिल सकती है, जिनके पास कारोबार का विचार तो है लेकिन पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं हैं।
सरकार ने सीमावर्ती गांवों के युवाओं, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए भी स्वरोजगार शुरू करने को लेकर विशेष आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन देने की योजना बनाई है।
उत्तराखंड सरकार पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में हिल इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की योजना है। इन औद्योगिक पार्कों के जरिए पहाड़ी क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से युवाओं को नौकरी के लिए दूसरे शहरों या राज्यों में जाने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही, नए कारोबार और उद्योग शुरू होने से आसपास की दुकानों, सेवाओं और छोटे व्यवसायों को भी फायदा मिल सकता है।
सरकार की युवा-केंद्रित योजनाओं का दायरा केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती गांवों के युवाओं, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को स्वरोजगार के लिए अतिरिक्त सहायता देने की भी योजना है।
इसके अलावा हर साल राज्य बाल वीरता पुरस्कार देने की भी योजना है। यह पुरस्कार आपदा या दुर्घटना के दौरान असाधारण साहस दिखाने वाले बच्चों को दिया जाएगा। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में, जहां प्राकृतिक आपदाओं और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, बच्चों के साहस को सम्मानित करने की पहल का खास महत्व है।
उत्तराखंड सरकार की इन पहलों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। युवा आयोग के जरिए युवाओं की समस्याओं को नीति निर्माण में जगह देने की कोशिश होगी, जबकि मुफ्त कोचिंग, आर्थिक सहायता और औद्योगिक पार्कों के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
अगर इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो उत्तराखंड के युवाओं को अपने सपने पूरे करने के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत कम हो सकती है और राज्य में ही उनके लिए बेहतर भविष्य के रास्ते खुल सकते हैं।