वसुंधरा राजे: राजघराने की बेटी जिन्हें राजस्थान की पहली महिला CM होने का गौरव प्राप्त हुआ

By अंकित सिंह | Mar 08, 2022

मध्य प्रदेश के ग्वालियर राजघराने में जन्मी वसुंधरा राजे सिंधिया भाजपा की वरिष्ठ नेता हैं। भैरों सिंह शेखावत के बाद राजस्थान में भाजपा को नई ऊंचाई तक पहुंचाने वाली वसुंधरा राजे का जन्म 8 मार्च 1953 को हुआ था। राजघराने में जन्मी वसुंधरा राजे का बचपन मुंबई में बीता था। उनके पिताजी महाराजा जीवाजी राव सिंधिया थे जबकि माता विजयाराजे सिंधिया थी। राजनीति में वसुंधरा राजे ने कई मुकाम हासिल किए हैं। तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद भी उन्होंने राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त किया। विपक्ष की नजर में 'महारानी' वसुंधरा राजे का राजस्थान में जमीनी पकड़ बेहद मजबूत है। वसुंधरा राजे की शादी 20 साल की उम्र में धौलपुर राजघराने के महाराजा हेमंत सिंह से हुई थी। वसुंधरा राजे के बेटे का नाम दुष्यंत सिंह है जो कि भाजपा के सांसद भी हैं।

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1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की कैबिनेट में वसुंधरा राज्य को मंत्री बनाया गया था और उन्हें विदेश राज्यमंत्री का पदभार सौंपा गया था। हालांकि यह वह वक्त था जब राजस्थान में भाजपा नई पीढ़ी को तैयार कर रही थी। भैरों सिंह शेखावत राजनीति से दूर होते जा रहे थे। वसुंधरा ने राजस्थान में पार्टी को मजबूत करने का काम किया और उनके नेतृत्व में भाजपा ने राजस्थान में 2003 के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी। इसके बाद ही पार्टी ने वसुंधरा राजे को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया था। इसके साथ ही वसुंधरा राजे को राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त हुआ था। उनके नेतृत्व में भाजपा ने शानदार 5 साल राजस्थान में अपना सरकार चलाया हालांकि 2008 के चुनाव में पार्टी को सफलता नहीं मिल पाई थी। लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से वसुंधरा राजे के नेतृत्व में पार्टी ने शानदार जीत हासिल की और उसे 160 सीट मिली। इसके साथ ही वसुंधरा राजे दोबारा राजस्थान की मुख्यमंत्री बनीं।

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राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि वसुंधरा राजे के पार्टी में जितने समर्थक है उतने ही आलोचक भी हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा ने कुछ खास सफलता हासिल नहीं की। इसके बाद से वसुंधरा राजे का राजनीतिक कैरियर हाशिए पर दिखाई देता रहा है। वसुंधरा समर्थकों का दावा है कि राजस्थान में उनके बिना भाजपा अधूरी है जबकि दूसरा खेमा राजस्थान में वसुंधरा के विकल्प की तलाश में जुटी हुई है। कुल मिलाकर देखें तो भारतीय राजनीति में वसुंधरा राजे का कद काफी बड़ा है। जिस देश में आज भी महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर लगातार सवाल उठते हैं, वहां वसुंधरा राजे ने एक अलग पहचान बना कर कई महिलाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया है। 

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