By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 03, 2026
नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि विकास का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने आगाह किया कि ऐसा नहीं होने पर युवाओं का लोकतंत्र में विश्वास कम हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समावेशिता से विकास को टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिल सकती है और आम सहमति के आधार पर निर्णय लेना जरूरी है।
दुनिया के कुछ हिस्सों में लोग फिर से कह रहे हैं कि साम्यवाद आ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम.... साम्यवाद के विरोधी नहीं हैं लेकिन एक प्रभावी लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्थान शासन की कोई दूसरी प्रणाली नहीं ले सकती।’’ राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्होंने कहा कि उनका दृढ़ विश्वास है कि न केवल भारत में बल्कि दुनिया में कहीं भी केवल स्वतंत्र और पारदर्शी चर्चा ही लोकतंत्र को मजबूत करती है। विकास का लाभ सभी तक पहुंचना लोकतंत्र की स्थिरता के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात कहने, काम करने, कानूनी तरीके से कमाने और अपनी इच्छा के अनुसार धन खर्च करने का अधिकार होना चाहिए। राधाकृष्णन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अल्पविकसित से विकासशील और अब विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हम खुद को विकसित अर्थव्यवस्था तभी कह सकते हैं जब यह सभी का समावेशी विकास हो और इसके लाभ हर कोने-कोने तक पहुंचें।
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि तेजी से हो रहे बदलावों के इस दौर में, जब वैश्विक तनाव बढ़ रहे हैं और वैश्विक व्यापार बदल रहा है, हमें आम सहमति से फैसले लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम चर्चा कर सकते हैं और एक ऐसे अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं जो सभी को स्वीकार्य हो। राज्यसभा के सभापति के रूप में उनका दृढ़ विश्वास है कि केवल स्वतंत्र और पारदर्शी चर्चा ही लोकतंत्र को मजबूत करती है।
उपराष्ट्रपति ने नीति निर्माताओं को हमेशा जमीनी तथ्यों से अवगत रहने की सलाह देते हुए कहा, नीति निर्माण में इतना लचीला होना चाहिए कि वह नीति अपने आप में एक बड़ी सफलता बन जाए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने यह साबित करके दिखाया है कि लोकतंत्र और विकास दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक मजबूती को सामाजिक मजबूती से अलग नहीं किया जा सकता और वित्तीय समावेश तथा पारदर्शिता को बढ़ाने में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), जीएसटी और जैम त्रिमूर्ति (जन धन योजना, आधार और मोबाइल) ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।
राधाकृष्णन कहा कि अगस्त 2026 तक 59 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले जा चुके हैं, जबकि जीएसटी पंजीकरण का आंकड़ा 2017 के लगभग 66.5 लाख से बढ़कर मई 2026 में 1.65 करोड़ हो गया है।