Vanakkam Poorvottar: CM Vijay ने विधानसभा में उड़ाया Stalin का मजाक, जवाब में DMK प्रमुख ने किया तगड़ा पलटवार

By नीरज कुमार दुबे | Jun 25, 2026

तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री विजय और द्रमुक नेता एमके स्टालिन के बीच छिड़ी टकराहट ने राज्य की राजनीति के तापमान को बढ़ा दिया है। विधानसभा के भीतर शुरू हुई यह जुबानी जंग अब जनता और सोशल मीडिया तक पहुंच चुकी है। आरोप, व्यंग्य, अभिनय शैली, हाथ के इशारे और कटाक्षों के बीच यह संघर्ष केवल दो नेताओं की व्यक्तिगत भिडंत नहीं रह गया, बल्कि तमिलनाडु की बदलती राजनीति का संकेत भी बन गया है।

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विजय का यह हमला केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं था, बल्कि इस दौरान उन्होंने जिस प्रकार का अभिनय किया उसने द्रमुक को चिढ़ा दिया। भाषण के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने वही हाथ का इशारा दोहराया जो हाल के महीनों में स्टालिन से जोड़ा जाता रहा है और जो पहले ही राजनीतिक मीम बन चुका था। यह दृश्य कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। द्रमुक विधायकों ने विजय के भाषण का विरोध करते हुए सदन से बहिर्गमन भी किया, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपना भाषण जारी रखा।

वहीं एमके स्टालिन ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई। तिरुवारुर में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा में रहें या न रहें, वह जनता के मन में हमेशा मौजूद रहेंगे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर किसी को उन्हें देखना है तो सचिवालय की उन फाइलों में देखे जहां कलैञर अधिकार योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं दर्ज हैं। स्टालिन ने यह भी कहा कि राजनीति को अभिनय का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।

स्टालिन ने विजय पर विधानसभा की गरिमा घटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का भाषण जनहित के मुद्दों से ज्यादा फिल्मी प्रस्तुति जैसा था। उन्होंने कहा कि बिजली कटौती, किसानों की समस्याएं, कानून व्यवस्था और चुनावी वादों जैसे गंभीर सवालों पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। स्टालिन ने यह आरोप भी लगाया कि विजय ने किसानों के आंदोलनों को विपक्ष के उकसावे से प्रेरित बताकर किसानों का अपमान किया है।

द्रमुक नेता ने विधानसभा की कार्यवाही के फिल्मांकन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के भाषण को एक ही दृश्य में बिना व्यवधान के रिकॉर्ड होने दिया, मानो विधानसभा की कार्यवाही नहीं बल्कि किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो। स्टालिन ने विजय को सलाह दी कि वह अभिनेता की छवि से बाहर निकलकर मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभाएं।

देखा जाये तो यह टकराव केवल व्यक्तिगत बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसके पीछे तमिलनाडु की राजनीति में उभरती नई शक्ति संतुलन की कहानी छिपी हुई है। विजय ने वर्ष 2024 में अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम की शुरुआत की थी और कम समय में ही वह राज्य की राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे। उनकी लोकप्रियता का आधार अभी भी काफी हद तक उनकी फिल्मी छवि है, लेकिन विधानसभा में उनके आक्रामक तेवर यह दिखाते हैं कि वह खुद को केवल अभिनेता नेता के रूप में नहीं बल्कि एक वैकल्पिक राजनीतिक केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

दूसरी ओर, द्रमुक के लिए यह चुनौती साधारण नहीं है। करुणानिधि और स्टालिन की लंबी राजनीतिक विरासत वाली पार्टी अब ऐसे प्रतिद्वंद्वी से जूझ रही है जो जनता पर प्रभाव रखने की राजनीति में बेहद मजबूत माना जाता है। विजय की शैली युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को आकर्षित कर रही है। यही कारण है कि द्रमुक उनकी हर टिप्पणी का तत्काल जवाब दे रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष आने वाले चुनावों की दिशा तय कर सकता है क्योंकि विजय की रणनीति साफ दिखाई देती है। वह खुद को परंपरागत दलों से अलग, आक्रामक और सीधे संवाद करने वाले नेता के रूप में पेश कर रहे हैं। वहीं स्टालिन अनुभव, प्रशासनिक कामकाज और द्रमुक की सामाजिक न्याय वाली राजनीति को अपनी ताकत बनाकर जवाब दे रहे हैं।

बहरहाल, तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से मजबूत व्यक्तित्वों और भावनात्मक राजनीतिक शैली के लिए जानी जाती रही है। अब विजय और स्टालिन की भिडंत ने उसी परंपरा को नए दौर में पहुंचा दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता फिल्मी करिश्मे को ज्यादा महत्व देती है या अनुभवी राजनीतिक नेतृत्व को। फिलहाल इतना तय है कि यह टकराव राज्य की राजनीति को लंबे समय तक गर्माए रखेगा।

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