Dussehra 2024: 12 अक्टूबर को मनाई जाएगी विजयादशमी, हिंदू धर्म में इस पर्व का है विशेष महत्व

By डा. अनीष व्यास | Oct 10, 2024

हर साल नवरात्रि पर्व के समापन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में दशहरा पर्व मनाया जाता है। इस साल विजयादशमी पर्व 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल विजयादशमी पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि मनाई जाती है। यही कारण है कि इसे विजयादशमी भी कहा जाता है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि इस साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 12 अक्तूबर प्रातः 10:58 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन तिथि का समापन: 13 अक्तूबर 2024, प्रातः 09:08 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार दशहरा का त्योहार इस साल 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा। हर साल दशहरा का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। दशहरा के दिन भगवान राम ने रावण का वध कर युद्ध में जीत हासिल की थी। इस पर्व को असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में भी मनाया जाता है। दशहरा पर्व हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस त्योहार को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था, इसलिए भी शारदीय नवरात्र की दशमी तिथि को ये उत्सव मनाया जाता है। कई जगह पर इस दिन मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन भी किया जाता है।

इसे भी पढ़ें: Saraswati Puja 2024: नवरात्रि के 7वें दिन से लेकर दशहरे तक चलता है सरस्वती पूजा का उत्सव, जानिए महत्व

दशहरा तिथि

दशमी तिथि का आरंभ: 12 अक्तूबर प्रातः 10:58 मिनट पर 

तिथि का समापन: 13 अक्तूबर 2024, प्रातः 09:08 मिनट पर 

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार ऐसे में दशहरा 12 अक्तूबर 2024 को मनाया जाएगा। 

शुभ संयोग

भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजयदशमी के दिन श्रवण नक्षत्र का होना बहुत शुभ होता है, और इस साल इसका संयोग बन रहा है। बता दें श्रवण नक्षत्र 12 अक्तूबर को सुबह 5:25 मिनट से प्रारंभ होकर 13 अक्तूबर को सुबह 4:27 मिनट पर समाप्त हो रहा है।  इसके साथ ही कुंभ राशि में शनि शश राजयोग, शुक्र और बुध लक्ष्मी नारायण योग के साथ शुक्र मालव्य नामक राजयोग का निर्माण कर रहे हैं।

शस्त्र पूजन मुहूर्त

कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि दशहरा के दिन कई जगहों पर शस्त्र पूजा करने का भी विधान है। दशहरा के दिन शस्त्र पूजा विजय मुहूर्त में की जाती है। इस साल दशहरा पूजन के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 2:02 मिनट से शुरू होगा, जो दोपहर 2: 48 तक रहेगा। मुहूर्त की कुल अवधि लगभग 46 मिनट तक रहेगी। 

रावण दहन मुहूर्त

भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि दशहरा के दिन लंकापति रावण और उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाता है। पुतलों का दहन सही समय में किया जाए, तो ही शुभ माना जाता है। विजयदशमी के दिन यानी 12 अक्टूबर को पुतलों के दहन का शुभ मुहूर्त सूर्यास्त के समय शाम 05.45 से रात 08.15 तक होगा।

कई तरीकों से मनाया जाता है दशहरा

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि अलग-अलग जगहों पर दशहरे का त्योहार अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। शस्त्र का प्रयोग करने वाले समुदाय इस दिन शस्त्र पूजन करते हैं। वहीं कई लोग इस दिन अपनी पुस्तकों, वाहन इत्यादि की भी पूजा करते हैं। किसी नए काम को शुरू करने के लिए यह दिन सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। कई जगहों पर दशहरे के दिन नया सामान खरीदने की भी परंपरा है। अधिकतर जगहों पर इस दिन रावण का पुतला जलाया जाता है। वहीं जब पुरुष रावण दहन के बाद घर लौटते हैं तो कुछ जगहों पर महिलाएं उनकी आरती उतारती हैं और टीका करती हैं।

मांगलिक कार्यों के लिए यह दिन माना जाता है शुभ

कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि दशहरा या विजयादशमी सर्वसिद्धिदायक तिथि मानी जाती है। इसलिए इस दिन सभी शुभ कार्य फलकारी माने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दशहरा के दिन बच्चों का अक्षर लेखन, घर या दुकान का निर्माण, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, अन्नप्राशन, कर्ण छेदन, यज्ञोपवीत संस्कार और भूमि पूजन आदि कार्य शुभ माने गए हैं। विजयादशमी के दिन विवाह संस्कार को निषेध माना गया है।

पूजन विधि

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि दशहरे के दिन सुबह जल्दी उठकर, नहा-धोकर साफ कपड़े पहने और गेहूं या चूने से दशहरे की प्रतिमा बनाएं। गाय के गोबर से 9 गोले व 2 कटोरियां बनाकर, एक कटोरी में सिक्के और दूसरी कटोरी में रोली, चावल, जौ व फल रखें। अब प्रतिमा को केले, जौ, गुड़ और मूली अर्पित करें। यदि बहीखातों या शस्त्रों की पूजा कर रहे हैं तो उन पर भी ये सामग्री जरूर अर्पित करें। इसके बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा करें और गरीबों को भोजन कराएं। रावण दहन के बाद शमी वृक्ष की पत्ती अपने परिजनों को दें। अंत में अपने बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें।

- डा. अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक

प्रमुख खबरें

Lewis Hamilton की Barcelona में धमाकेदार वापसी, Ferrari को दिलाई सीजन की पहली जीत

Organic और Zero Maida प्रोडक्ट्स खरीदने से पहले सावधान! FSSAI ने कई Brands को भेजा नोटिस।

G7 Summit से पहले France में हलचल तेज, क्या होगी PM Modi और Donald Trump की मुलाकात? इन मुद्दों पर नजर।

Dharamsala में Shubman Gill और KL Rahul का तूफान, Team India ने Afghanistan को बुरी तरह हराया