भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रमों की नींव रखी थी विक्रम साराभाई ने

By टीम प्रभासाक्षी | Aug 12, 2022

विक्रम साराभाई ने भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान को जन्म दिया और उसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्रित्व काल में उन्होंने देश में अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रमों की नींव डाली। उन्होंने राकेट, उपग्रह निर्माण और उपग्रहों के उपयोग संबंधी देश के भावी कार्यक्रम को दिशा दी। भारत का चंद्रमा पर पहला अभियान चंद्रयान उसी आधारभूत योजनाओं की उपज है। रूस और अमेरिका जैसे देश विश्वयुद्ध के दौरान सामरिक तकनीक के कारण राकेट और उपग्रह निर्माण की दिशा में अग्रणी थे।

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दूसरा विश्वयुद्ध छिड़ने के बाद वह भारत आ गए तथा उन्होंने बंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान में डॉ. सीवी रमन की देखरेख में कास्मिक किरणों पर अनुसंधान कार्य शुरू किया। उनका पहला शोध पत्र कास्मिक किरणों के समय वितरण से संबंधित था जो उन्होंने भारतीय विज्ञान अकादमी के कार्यक्रम में पेश किया। विश्वयुद्ध समाप्त होने के बाद साराभाई ब्रिटेन लौटे और भौतिकी में अपना अनुसंधान पूरा करने के बाद पीएचडी की डिग्री हासिल की। भारत में टेलीविजन को विकासात्मक संचार का साधन बनाने की परिकल्पना साराभाई ने की थी। दूरदर्शन के शुरुआती परीक्षण और शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए ब्लूप्रिंट साराभाई ने ही बनाया था। 1975.76 में नासा के सहयोग से सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट से इसे संचालित किया गया। भारत के छह राज्यों और 2500 से अधिक गांवों में टीवी प्रसारण किया गया।

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साराभाई भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान आयोग (इसरो) के प्रथम अध्यक्ष थे। साराभाई ने जिस पहली संस्था की बुनियाद रखी वह अहमदाबाद की टेक्सटाइल अनुसंधान केंद्र थी। इसके अलावा उन्होंने अहमदाबाद के भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, भारतीय प्रबंधन संस्थान और कम्युनिटी साइंस केंद्र की स्थापना की। साराभाई विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में बहुत विश्वास रखते थे। इसके लिए उन्होंने अहमदाबाद में कम्युनिटी साइंस सेंटर की स्थापना की। जनवरी 1966 में भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा की मृत्यु के बाद साराभाई परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष बने। वह भारत में फार्मास्युटिकल अनुसंधान के क्षेत्र के अग्रणी समर्थक थे। 30 दिसंबर 1971 को केरल के कोवलम में साराभाई का निधन हो गया।

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